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    बोकारो के छात्र अंकित अपहरण-हत्याकांड में,तीन अभियुक्तों को मिली फांसी की सजा

    We News 24 Hindi » रांची,झारखण्ड 

    ब्यूरो संवाददाता दिनेश मंडल की रिपोर्ट 

    झारखण्ड : बोकारो के छात्र अंकित अपहरण-हत्याकांड में अपर सत्र न्यायाधीश (द्वितीय) जनार्दन सिंह की कोर्ट ने गुरुवार को तीन अभियुक्तों को फांसी की सजा सुनाई। बीस लाख की फिरौती के लिए 26 नवंबर 2013 को छठी कक्षा के 11 वर्षीय छात्र सुधांशु कुमार उर्फ अंकित को अगवा किया गया था। इसके बाद गला व मुंह दबाकर हत्या कर दी गई। हत्या के बाद भी अपहर्ताओं ने घरवालों से पांच लाख रुपये फिरौती वसूल की थी। अंकित मूल रूप से बिहार के रोहतास का रहनेवाला था और बोकारो में अपने मौसा के घर रहकर पढ़ाई कर रहा था।

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    अदालत ने तीनों अभियुक्त विवेक कुमार, संजय रजक और संजीव कुमार को मंगलवार को दोषी करार दिया था। गुरुवार को तीनों को फांसी की सजा दी गई। अभियोजन पक्ष की ओर से कोर्ट में कुल 15 गवाह प्रस्तुत किए गए। आईओ तत्कालीन सेक्टर-4 थाना के सब इंस्पेक्टर नागेंद्र राय से जांच कर ठोस साक्ष्य प्रस्तुत किए। सरकार की ओर से कोर्ट में अभियोजन का पक्ष रखने वाले लोक अभियोजन प्रवीन कुमार श्रीवास्तव ने यह जानकारी दी। कोर्ट ने फांसी की सजा सुनाने के साथ फिरौती के लिए अपहरण में तीनों को उम्रकैद और साक्ष्य छिपाने की धारा में 5-5 साल की सजा सुनाते हुए 50-50 हजार रुपए जुर्माना भी लगाया है। सभी सजाएं साथ-साथ चलेंगी।  


    क्या था घटनाक्रम
    बिहार के जलबइया, रोहतास निवासी अमलेश कुमार सिंह का इकलौता पुत्र सुधांशु कुमार उर्फ अंकित बोकारो में अपने मौसा मणीजी सिंह के सेक्टर-4 सी स्थित आवास में रहकर संत जेवियर्स स्कूल में पढ़ रहा था। घटना की शाम चार बजे घर से सेक्टर-4 डी. में ट्यूशन पढ़ने गया था। वहां लौटने पर  घर नहीं पहुंचा। रास्ते में ही उसे अगवा कर लिया गया। काफी खोजबीन के बाद मौसा ने सेक्टर-4 थाने में गुमशुदगी का सनहा दर्ज कराया था। 


    बिहार के तारेगना में मांगी गई थी फिरौती

    पुलिस अंकित की तलाश में थी। इस बीच आरोपियों ने 28 नवंबर 2013 को मौसा व पिता को फोन कर 20 लाख की फिरौती मांगी। पुलिस की जानकारी में दो दिन तक बातचीत के बाद पांच लाख फिरौती तय हुई। अपहर्ताओं के कहे मुताबिक चिह्नत स्थान बिहार पटना से सटे तारेगना रेलवे स्टेशन मंदिर के पास पांच लाख रुपए रख दिए गए। आरोपियों ने फोन कर कहा सीधे वापस चले जाओ, अंकित बोकारो पहुंच रहा है। मगर अपहर्ताओं ने धोखा दिया। अंकित की हत्या की जा चुकी थी। 

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    30 नवंबर को विवेक हुआ गिरफ्तार
    अंकित के परिजन फिरौती की रकम तारेगना में देने के बाद बोकारो पहुंचे, पर अंकित नहीं पहुंचा। इसके बाद पुलिस की सक्रियता बढ़ी। मोबाइल टावर लोकेशन के आधार पर सेक्टर-3 से विवेक की गिरफ्तारी की गई। पूछताछ में वह पुलिस को इधर-उधर भटकाता रहा। निशानदेही पर तीन अन्य आरोपी गिरफ्तार हुए। तीनों के स्वीकारोक्ति बयान से स्पष्ट हो गया कि आरोपियों ने अगवा करने के बाद अगले ही रात अंकित की हत्या कर शव फेंक दिया। 


    गोरहर से कंकाल बरामद हुआ

    अपहर्ताओं के बयान के आधार पर शव की तलाश शुरू की कई, लेकिन शव बरामद करने में सफलता नहीं मिली। इसके बाद स्पेशल टास्क फोर्स का गठन किया गया। खोज के क्रम में सात दिसंबर की सुबह डुमरी में चिरयापुल के पास अंकित का स्कूल बैग और किताबें बरामद की गईं। इसके बाद तलाश को और तेज किया गया। कुछ आगे बढ़ने पर हजारीबग के गोरहर थाना क्षेत्र की कलकतिया घाटी में कसीयाडीह के पास जीटी रोड पर धान के खेत के पास कंकाल बरामद हुआ। कंकाल का डीएनए टेस्ट कराया गया, जिसमें पुष्टि हुई कि कंकाल अंकित का है। 


    क्यों की गई अंकित की हत्या

    अपहृत अंकित को लेकर विवेक के सारण, छपरा वाले ठिकाने पर जाना था। मामले में चौथा आरोपी नाबालिग स्विफ्ट कार चला रहा था। अगवा करने के बाद इधर-उधर भटकते रहे। 27 नवंबर को बिहार के लिए रवाना हुए। रात नौ बजे जब जीटी रोड से हजारीबाग के गोरहर थाना से गुजर रहे थे तो अंकित शोर मचाना शुरू किया। पकड़े जाने के डर से आरोपियों ने उसका मुंह व गला दबा दिया, जिससे उसकी मौत हो गई। 

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    कौन हैं सजा पाने वाले
    दोषी विवेक सारण के हकीमपुर निवासी मदन सिंह का पुत्र है, जो बोकारो के सेक्टर-12 में रहता था। संजय रजक नुमार जमुई निवासी फलेश्वर रजक का पुत्र है, जो सेक्टर-1 में रहता था। संजीव कुमार कुर्था अरबल निवासी रंधीर सिंह का पुत्र है, जो सेक्टर-3 में रहता था। पुलिस रिकॉड के अनुसार तीनों आरोपी नशेड़ी किस्म के थे। चौथा आरोपी का मामला जुवेनाइल जस्टिस बोर्ड में गया था।


    परिवार का इकलौता चिराग बुझ गया
    मासूम अंकित रोहतास के मध्यम वर्गीय किसान अमलेश कुमार सिंह का इकलौता पुत्र था। उसके मौसा बोकारो पुलिस बल में कार्यरत थे। उन्होंने उसे बोकारो में रखा था, ताकि अच्छी शिक्षा हो सके। उसकी अपहरण के बाद हत्या से परिवार का इकलौता चिराग बुझ गया।

    कव्बिता चौधरी द्वारा किया गया पोस्ट 

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