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    महाराष्ट्र में अजित पवार ने अपने चाचा शरद पवार का ही इतिहास दोहराया

    We News 24 Hindi »मुंबई,महाराष्ट्र

    कविता की रिपोर्ट
    महाराष्ट्र :में विधानसभा चुनाव नतीजों के करीब एक महीने बाद भाजपा-राकांपा की सरकार ने शपथ ग्रहण कर लिया। इस घटनाक्रम ने देश के राजनीतिक हलके को चौंका दिया है। हालांकि इससे पहले भी विभिन्न मौकों पर ऐसे चौंकानेवाले घटनाक्रम से राजनीति को रू ब रू होते रहना पड़ा है। महाराष्ट्र में खुद शरद पवार 1978 में ऐसी उठापटक के सूत्रधार रहे। राजनीतिक विश्लेषकों के मुताबिक अजित पवार ने अपने चाचा शरद पवार का ही इतिहास दोहराया है। 

    महाराष्ट्र में ही 1978 में शरद पवार ने तोड़ी थी पार्टी
    आपातकाल के बाद 1977 में हुए लोकसभा चुनाव में देश भर में कांग्रेस की करारी हार के साथ महाराष्ट्र में भी उसे कई सीटों पर पराजय का सामना करना पड़ा। इसके बाद कांग्रेस विभाजित होकर कांग्रेस-यू और कांग्रेस-आई के रूप में दो धड़ों में बंट गई। उस समय युवा शरद पवार और उनके गुरु यशवंत राव पाटिल कांग्रेस-यू में आ गए। 



    1978 में हुए राज्य विधानसभा के चुनाव के बाद जनता पार्टी को अलग रखने के लिए दोनों धड़ों ने मिलकर सरकार बनाई और वसंत दादा पाटिल मुख्यमंत्री बने रहे। कहा जाता है कि जुलाई 1978 में शरद पवार ने अपने गुरु के इशारे पर कांग्रेस-यू से अलग हो गए और जनता पार्टी के साथ मिलकर प्रोग्रेसिव डेमोक्रैटिक फ्रंट की सरकार बनाई। मात्र 38 साल की उम्र में शरद पवार राज्य के सबसे युवा मुख्यमंत्री बने। बाद में यशवंत राव पाटिल भी शरद पवार की पार्टी में शामिल हो गए। 

    भजनलाल अपनी ही देवीलाल सरकार पलटकर बन गए सीएम
    आपातकाल के बाद हरियाणा में 1979 में चौधरी देवीलाल की सरकार बनी। भजनलाल इस सरकार में डेयरी मंत्री बने। लेकिन सरकार में मंत्री रहते हुए हुए ही उन्होंने अपनी ही सरकार का  तख्ता पलट दिया और खुद की सरकार बना ली थी। हुआ यूं कि देवीलाल को सरकार में बगावत की सुगबुगाहट पता चल रही थी। उन्होंने करीब 42 विधायकों को तेजाखेड़ा के अपने किलेनुमा घर में बंदूक की नोक पर बंद कर लिया।


    इन्हीं में से एक विधायक राव निहाल सिंह ने तेजाखेड़ा से छुट्टी ली और अपनी बेटी की शादी के लिए घर पहुंच गए। लेकिन देवीलाल से रहा नहीं गया और वो पीछे–पीछे बिना बुलाए मेहमान के तौर पर वहां पहुंच गए। जब देवीलाल वहां पहुंचे तो एक और बिना बुलाए मेहमान से मिले, वो मेहमान थे भजनलाल। बाद में ये सारे विधायक भी मोलभाव कर भजनलाल के खेमे में चले गए। इस प्रकार जनता पार्टी के चौधरी देवीलाल की सरकार गिराकर भजनलाल 1979 में जनता पार्टी से ही हरियाणा के मुख्यमंत्री बन गए।

    केंद्र की वाजपेयी सरकार एक वोट से गिरी
    1998 में राष्ट्रीय जनतांत्रिक गठबंधन की सरकार केंद्र में सत्ता में आई थी। भाजपा के अटल बिहारी वाजपेयी प्रधानमंत्री बने। लेकिन 13 महीने बाद ही एनडीए में शामिल अन्नाडीएमके ने तमिलनाडु की करुणानिधि सरकार बर्खास्त करने की मांग को लेकर सरकार से समर्थन वापस ले लिया। लोकसभा में अविश्वास प्रस्ताव आया। दो महीने पहले ही  कांग्रेस सांसद गिरधर गोमांग ओडिशा के मुख्यमंत्री बने थे लेकिन तब तक लोकसभा से इस्तीफा नहीं दिया था। अविश्वास प्रस्ताव के दौरान वह सदन में मतदान करने आ गए और उन्हीं के एक वोट से वाजपेयी सरकार गिर गई।  

    यूपी में जगदंबिका पाल एक दिन के लिए सीएम
    उत्तर प्रदेश में 1998 में भाजपा को पूर्ण बहुमत नहीं था। भाजपा नेता कल्याण सिंह बाहरी विधायकों के समर्थन से सरकार बनाने में कामयाब हो गए। लेकिन राज्यपाल रोमेश भंडारी ने राष्ट्रपति शासन की सिफारिश कर दी। केंद्र सरकार द्वारा इसे अस्वीकार कर देने के बाद भी राज्यपाल ने कल्याण सरकार को बर्खास्त कर जगदंबिका पाल को मुख्यमंत्री की शपथ दिला दी। पूर्व प्रधानमंत्री अटल बिहारी वाजपेयी इसके खिलाफ लखनऊ में धरने पर बैठ गए और कल्याण सिंह उच्च न्यायालय चले गए। सदन में बहुमत परीक्षण हुआ और इसमें कल्याण सिंह को सदन में बहुमत मिल गया। जगदंबिका पाल एक दिन ही मुख्यमंत्री रह पाए। 

    यूपी में 2003 में मुलायम सिंह तीसरी बार मुख्यमंत्री बने
    2002 में यूपी चुनाव के बाद किसी दल को बहुमत नहीं मिला। आखिकार वहां राष्ट्रपति शासन लगाना पड़ा। कुछ दिनों बाद भाजपा-बसपा ने मिलकर सरकार बनाई और मायावती मुख्यमंत्री बनीं। लेकिन 2003 में दोनों दलों में मतभेद के बाद भाजपा ने समर्थन वापस ले लिया। इसके बाद सपा ने कांग्रेस, भाजपा से अलग हुए कल्याण सिंह की राष्ट्रीय क्रांति पार्टी, अजित सिंह के राष्ट्रीय लोकदल, मार्क्सवादी कम्युनिस्ट पार्टी, बहुजन समाज पार्टी के 14 बाग़ी विधायकों और कुछ निर्दलीय विधायकों के समर्थन से सरकार बनाई।


    अपने ही उम्मीदवार जीतनराम मांझी को नीतीश ने हटाया
    लोकसभा के 2014 के चुनाव में बिहार में सत्तारूढ़ जदयू को करारी हार मिली। मुख्यमंत्री नीतीश कुमार ने खुद पद से इस्तीफा दे दिया और अपनी ही पार्टी के महादलित समुदाय से संबद्ध जीतनराम मांझी को मुख्यमंत्री के लिए चुना। लेकिन कुछ ही दिनों में मांझी से नीतीश के मतभेद उभरकर सामने आने लगे। अंतत: नीतीश को अपना जनाधार बचाए रखने के लिए मांझी को हटाने का निर्णय लेना पड़ा। फरवरी 2015 में उन्हें मांझी को जबर्दस्ती कुर्सी से हटाना पड़ा और नीतीश फिर मुख्यमंत्री बन गए। 

    कर्नाटक में 14 महीने के लिए येदियुरप्पा बने मुख्यमंत्री 
    कर्नाटक विधानसभा के पिछले 2018 के चुनाव में भाजपा सबसे बड़े दल के रूप में 104 विधायकों के साथ उभरी। बीएस येदियुरप्पा ने 17 मई, 2018 को सीएम पद की शपथ ली और दावा किया कि उनके पास बहुमत का आंकड़ा है। मगर 19 मई को बहुमत परीक्षण से ठीक पहले बहुमत नहीं जुट पाने के कारण उन्हें इस्तीफा देना पड़ा। इसके बाद कांग्रेस और जेडीएस ने गठबंधन कर एचडी कुमारस्वामी के नेतृत्व में सरकार बनाई जो 14 महीने ही चल पाई। इसके बाद येदियुरप्पा फिर मुख्यमंत्री

    काजल कुमारी द्वारा किया पोस्ट


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