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    नागरिकता संशोधन कानून के विरोध में असम, त्रिपुरा, नगालैंड समेत पूर्वोत्तर के कई राज्यों में विरोध-प्रदर्शन

    We News 24 Hindi »नई दिल्ली
    संवाददाता अंजलि कुमारी  की रिपोर्ट 

    नई दिल्ली :  नागरिकता संशोधन कानून के विरोध में असम, त्रिपुरा, नगालैंड समेत पूर्वोत्तर के कई राज्यों में विरोध-प्रदर्शन शनिवार को भी जारी रहा लेकिन कहीं से भी हिंसक वारदातों की खबर नहीं आई। हालांकि, पश्चिम बंगाल में हिंसा की लपटें शनिवार को राज्य के कई हिस्सों में फैल गईं। प्रदर्शनकारियों ने हावड़ा में रेलवे स्टेशन पर आग लगा दी तो कोना एक्सप्रेसवे पर छह बसों को आग के हवाले कर दिया। हाईवे बंद कर दिए और रेलगाड़ियां रोकीं।

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    हावड़ा में स्टेशन फूंका, सुरक्षाकर्मियों को पीटा
    पश्चिम बंगाल के हावड़ा जिले में भीड़ ने संकरेल रेलवे स्टेशन को आग के हवाले कर दिया और वहां तैनात सुरक्षाकर्मियों के साथ मारपीट की। रेलवे सुरक्षा बल के एक वरिष्ठ अधिकारी ने कहा, दोपहर के समय भीड़ स्टेशन परिसर में घुसी और टिकट काउंटर में आग लगा दी। जब रेलकर्मियों ने उन्हें रोकने का प्रयास किया तो उनकी पिटाई की गई। उपद्रवियों ने स्टेशन मास्टर के कमरे में तोड़फोड़ की और सिग्नल केबिन को भी बुरी तरह से क्षतिग्रस्त कर दिया। प्रदर्शनकारियों कई दुकानों को भी आग के हवाले कर दिया।

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    यात्रियों से भरी बसों में तोड़फोड़
    मुर्शिदाबाद में भीड़ ने बेलडांगा स्टेशन पर रखी रेलवे की संपत्ति को आग लगा दी। एक फायर ब्रिगेड के इंजन को क्षतिग्रस्त कर जला दिया। मौके पर पहुंची पुलिस पर भी पथराव किया गया। इसी जिले के सुती में, प्रदर्शनकारियों ने तीन सरकारी बसों में तोड़-फोड़ की और यात्रियों को जबरन बस से उतारकर एक बस को आग लगा दी। बसुदेवपुर हॉल्ट स्टेशन में भी तोड़-फोड़ की गई। जिले के फरक्का, जंगीपुर और पोरडांगा स्टेशनों पर ट्रेनें रोक दीं और पथराव भी किया। रेलवे प्रवक्ता ने बताया कि प्रदर्शनकारी संकरेल, नालपुर, मोरीग्राम और बकरनवाबाज़ स्टेशनों पर पटरियों पर बैठे रहे, जिससे रेल यातायात ठप रहा।

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    ममता ने कार्रवाई की चेतावनी दी
    पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी ने हिंसक प्रदर्शन और तोड़फोड़ करने वालों को कड़ी कार्रवाई की चेतावनी दी। उन्होंने लोगों से शांति बनाए रखने और लोकतांत्रिक तरीके से प्रदर्शन करने की अपील की। ममता ने कहा, कानून अपने हाथ में मत लीजिए। सड़क और रेल यातायात जाम मत कीजिए। सड़कों पर आम लोगों के लिए परेशानी खड़ी मत कीजिए। सरकारी संपत्तियों को नुकसान मत पहुंचाइए। जो लोग परेशानियां खड़ी करने के दोषी पाए जाएंगे, उनके खिलाफ कड़ी कार्रवाई की जाएगी। उन्होंने दोहराया कि नए कानून और एनआरसी का राज्य में कोई प्रभाव नहीं पड़ेगा। लोगों के बीच भ्रम मत फैलाइए।

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    असम में इंटरनेट सेवा सोमवार तक ठप
    असम में सोशल मीडिया के दुरुपयोग को रोकने के लिए 16 दिसंबर तक इंटरनेट सेवाएं ठप कर दी गई हैं। अतिरिक्त मुख्य सचिव (गृह एवं राजनीतिक विभाग) संजय कृष्ण ने बताया कि फेसबुक, व्हाट्सएप, ट्विटर और यू-ट्यूब जैसे सोशल मीडिया मंच का इस्तेमाल अफवाह फैलाने और तस्वीरों, वीडियो आदि को प्रसारित करने के लिए किया जा सकता है, जो लोगों उकासाने के साथ ही कानून-व्यवस्था को खराब कर सकती है। इसीलिए यह फैसला लिया गया है। अधिकारियों का दावा है कि परिस्थिति सामान्य होने पर ही इंटरनेट सेवाएं बहाल की जाएंगी. हालांकि बंद के बाद भी कुछ इलाकों में कुछ घंटो के लिए ब्रॉडबैंड सेवाएं चालू हो गई थीं


    गुवाहाटी, डिब्रूगढ़ में कर्फ्यू में ढील

    असम में सबसे ज्यादा हिंसाग्रस्त रहे गुवाहाटी और डिब्रूगढ़ में शनिवार को कर्फ्यू में कुछ घंटों की ढील दी गई है। अधिकारियों ने बताया कि गुवाहाटी में सुबह नौ बजे से शाम चार बजे तक जबकि, डिब्रूगढ़ में सुबह आठ से दोपहर दो बजे तक ढील दी गई।  दिसपुर, उजान बाजार, चांदमारी, सिलपुखुरी और जू रोड सहित कई स्थानों पर दुकानों के बाहर लंबी कतारें नजर आईं।ऑटो-रिक्शा और साइकिल-रिक्शा सड़कों पर नजर आए लेकिन बसें अब भी नदारद रहीं। शहर में पेट्रोल पंप भी खोल दिए गए हैं, जहां वाहनों की लंबी कतारें दिखीं। हालांकि, स्कूल और कार्यालय अब भी बंद हैं।

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    नगालैंड में स्कूल-कॉलेज बंद, नहीं चले वाहन
    नगालैंड की राजधानी कोहिमा में नगा छात्र संघ (एनएसएफ) ने शनिवार को छह घंटे का बंद बुलाया। इसकी वजह से कई हिस्सों में स्कूल, कॉलेज और बाजार बंद रहे और सड़कों से वाहन नदारद रहे। अधिकारियों ने यह जानकारी दी। संगठन ने बयान जारी कर कहा कि विवादित कानून के खिलाफ असंतोष दर्शाने के लिए बंद का आह्वाना किया गया। यह कानून राज्य के लोगों के हितों एवं भावनाओं के खिलाफ है।  प्रदर्शनकारियों ने परीक्षा देने जा रहे छात्रों, ड्यूटी पर जा रहे चिकित्साकर्मियों, मीडियाकर्मियों को रोका।


    शिलॉन्ग में नौ घंटे कर्फ्यू में ढील
    मेघालय के शिलॉन्ग में हालात बेहतर होने पर शनिवार को सुबह 10 बजे से शाम सात बजे तक कर्फ्यू में ढील दी गई। पूर्वी खासी हिल्स की जिला उपायुक्त एम डब्ल्यू नोंगबरी ने बताया कि राजधानी में कई स्थानों पर दुकानें और कार्यालय खुले। यातायात सामान्य रहा और पिछले 20 घंटे में किसी भी अप्रिय घटना होने की कोई खबर नहीं है। इस बीच, राज्य सरकार ने क्षेत्र में इनर लाइन परमिट (आईएलपी) लागू करने के मद्देनजर एक प्रस्ताव लाने के लिए विधानसभा का एक दिन का विशेष सत्र बुलाने का फैसला लिया है।  मुख्यमंत्री कोनराड संगमा की अगुवाई में राज्य के एक प्रतिनिधिमंडल ने गृह मंत्री अमित शाह से मुलाकात की और उन्हें पड़ोसी राज्य असम की मौजूदा स्थिति के कारण यहां हो रही आवश्यक वस्तुओं की कमी के बारे में अवगत कराया। मुख्यमंत्री कार्यालय ने कहा, गृह मंत्री ने मामले की जल्द से जल्द समीक्षा करने पर सहमति जताई।

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    असम में फंसे यात्रियों की मदद के लिए विशेष ट्रेन चला रहा रेलवे
    विरोध-प्रदर्शन के बीच असम में फंसे यात्रियों की मदद के लिए रेलवे गुवाहाटी से विशेष रेलगाड़ियां चलाा रहा है ताकि लोग ऊपरी असम में अपने गंतव्य तक पहुंच सकें। शनिवार को एक ऐसी ही ट्रेन दीमापुर के लिए भेजी गई। असम के गोलाघाट एवं डिब्रूगढ़ के लिए भी शनिवार को ट्रेन चलाई गईं। रेलवे के एक वरिष्ठ अधिकारी ने बताया कि कि पिछले दो दिनों में 2000 से 2400 यात्रियों को उनके गंतव्य तक पहुंचने में मदद की गई है । लगभग 600-800 यात्री अब भी गुवाहाटी में फंसे हुए हैं । इन लोगों को भी रविवार सुबह तक वहां से निकाल लिया जाएगा। विशेष ट्रेनों के बारे में यात्रियों को बताने के लिए रेलवे फेसबुक और ट्विटर जैसे सोशल मीडिया प्लेटफार्म का सहारा ले रहा है।


    भाजपा को फायदा मिलने की उम्मीद

    नागरिकता कानून के विरोध में असम तथा देश के कुछ हिस्सों में विरोध प्रदर्शन से भाजपा में कई नेताओं को आश्चर्य हो रहा है लेकिन उन्हें पूरा भरोसा है कि इस विवादास्पद कानून के लागू होने से उसे फयदा होगा। भाजपा असम में सत्ता में है जबकि पूर्वोत्तर के अन्य राज्यों में या तो अपने बल पर अथवा क्षेत्रीय दलों के साथ सत्ता में है। पार्टी  नेताओं का मानना है कि स्थिति नियंत्रण में आ जाएगी हालांकि उन्हें असम में इसके प्रभावों को लेकर कुछ चिंताएं भी हैं। असम में बांग्लादेश से अवैध घुसपैठ के मुद्दे पर हिन्दू एकजुटता के कारण पार्टी 2016 में पहली बार सत्ता में आई थी। हालांकि स्थानीय असमिया पहचान के मुद्दे पर अगर यह विरोध प्रदर्शन ज्यादा समय तक रहा तब इसमें राजनीतिक गणित को बदलने की क्षमता भी है। इसके बाद भी भाजपा नेता पश्चिम बंगाल में अपनी संभावनाओं को लेकर काफी उत्साहित हैं जहां इसके कारण काफी संख्या में लोगों को लाभ होगा। राज्य भाजपा अध्यक्ष दिलीप घोष ने दावा किया कि शरणार्थियों की संख्या दो करोड़ हो सकती है। उन्होंने पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री एवं तृणमूल कांग्रेस प्रमुख ममता बनर्जी पर राज्य में अशांति को बढ़ावा देने का आरोप लगाया। असम और पश्चिम बंगाल में अप्रैल-मई 2021 में विधानसभा चुनाव होने वाले हैं जब तमिलनाडु, केरल और पुदुचेरी में भी चुनाव होंगे ।  

    कोमल कुमारी द्वारा किया गया पोस्ट 

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