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    नागरिकता संशोधन कानून पर दिल्ली की जामा मस्जिद के शाही इमाम सैयद अहमद बुखारी ने क्या कहा ,पढ़े पूरी खबर


    We News 24 Hindi »नई दिल्ली
    संवाददाता अंजुम खान की रिपोर्ट 

    नई दिल्ली : नागरिकता संशोधन कानून (सीएए) के खिलाफ पहले दिल्ली के जामिया मिलिया इस्लामिया विश्वविद्यालय में प्रदर्शन के दौरान बवाल हुआ और उसके बाद मंगलवार को दिल्ली के सीलमपुर और जाफराबाद में प्रदर्शन अचानक उग्र हो गया। इस पर दिल्ली की जामा मस्जिद के शाही इमाम सैयद अहमद बुखारी ने कहा कि विरोध करना भारत के लोगों का लोकतांत्रिक अधिकार है, कोई भी हमें ऐसा करने से नहीं रोक सकता। हालांकि, यह महत्वपूर्ण है कि यह प्रदर्शन नियंत्रण में किया जाए है, हमें अपनी भावनाओं को नियंत्रण में रखना सबसे महत्वपूर्ण हिस्सा है। 


    उन्होंने कहा कि नागरिकता संशोधन अधिनियम (CAA) और नागरिकों के राष्ट्रीय रजिस्टर (NRC) के बीच अंतर है। एक CAA है जो एक कानून बन गया है और दूसरा NRC है जिसकी केवल घोषणा की गई है, यह एक कानून नहीं है। सीएए के तहत पाकिस्तान, अफगानिस्तान और बांग्लादेश से भारत आने वाले मुस्लिम शरणार्थियों को भारतीय नागरिकता नहीं मिलेगी। इसका भारत में रहने वाले मुसलमानों से कोई लेना-देना नहीं है।
    वहीं पूर्व वित्त मंत्री और कांग्रेस के दिग्गज नेता पी चिदंबरम का बयान आया है। नागरिकता संशोधन कानून पर पी चिदंबरम ने सवाल उठाए हैं और कहा है कि जो पहले से ही पाकिस्तान के नागरिक हैं, उन्हें नागरिकता क्यों देनी चाहिए? गौरतलब है कि नागरिकता कानून पर लगातार देश के अलग-अलग हिस्सों में प्रदर्शन हो रहे हैं। नागरिकता कानून की संवैधानिक वैधता को सुप्रीम कोर्ट में चुनौती भी दी गई है, जिस पर आज सुनवाई भी होनी है। 


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    उत्तर पूर्वी दिल्ली के जाफराबाद-सीलमपुर इलाके में मंगलवार को फैली हिंसा में कुल 18 लोग जख्मी हो गए। घायलों में 11 दिल्ली पुलिस के अधिकारी-कर्मचारी और 7 आम नागरिक हैं। इस मामले में पुलिस ने दो अलग-अलग  मामले दर्ज कर फिलहाल 5 लोगों को हिरासत में ले लिया है।  दिल्ली पुलिस प्रवक्ता एसीपी अनिल मित्तल ने देर शाम आईएएनएस को बताया कि फिलहाल इलाके में एहतियातन 5 कंपनी अतिरिक्त पुलिस बल तैनात किया गया है। हालात को तुरंत काबू करने के लिए तीनों जिलों से अतिरिक्त पुलिस बल को घटना के तुरंत बाद मौके पर बुलाना पड़ा।

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    मित्तल ने आगे कहा, “सरकारी संपत्ति को नुकसान पहुंचाने, शांति भंग करने, दंगा फैलाने, आमजन का रास्ता रोकने, सरकारी काम में बाधा डालने की धाराओं के तहत दो अलग-अलग एफआईआर दर्ज की गई हैं। एक मामला सीलमपुर और दूसरा मामला जाफराबाद थाने में दर्ज किया गया है।” दिल्ली पुलिस के मुताबिक, “घटना की शुरुआत उस समय हुई, जब कुछ लोग शांतिपूर्ण ढंग से विरोध प्रदर्शन कर लौट रहे थे। उसी वक्त भीड़ में शामिल कुछ शरारती तत्वों ने अचानक सड़कों-गलियों में भगदड़ मचाना और पथराव करना शुरू कर दिया।


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    अचानक शुरू हुई पत्थरबाजी से सड़क-गलियों में आ जा रहे लोगों में भगदड़ मच गई। देखते-देखते हालात बेकाबू होते चले गए। जब तक पुलिस मोचेर् पर डटती उपद्रवियों की भीड़ चारों ओर फैल चुकी थी। लिहाजा, आनन-फानन में दिल्ली पुलिस कमिश्नर की रिजर्व फोर्स (सीपी रिजर्व फोर्स) की 5 अतिरिक्त कंपनियों के करीब 300 जवानों को भी मौके पर बुला लिया गया। इसके साथ ही पूवीर्, शाहदरा और उत्तर पूर्वी जिले के थानों और पुलिस लाइन में मौजूद अतिरिक्त पुलिस बल को भी मौके पर बुला लिया गया। पुलिस के मोर्चा संभालने तक हिंसा पर उतरी भीड़ दो पुलिस बूथ, दो बसें, तीन मोटरसाइकिलों को आग के हवाले कर चुकी थी। सबसे ज्यादा पथराव सीलमपुर और जाफराबाद थाना क्षेत्र में हुआ बताया जाता है।


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    गौरतलब है कि जब से संसद की दोनों सदनों ने नागरिकता संशोधन बिल पर मुहर लगाई है और राष्ट्रपति ने इसे कानूनी अमलीजामा  पहनाया है, तब से इसके खिलाफ प्रदर्शन हो रहे हैं। इस कानून के खिलाफ में रविवार को सबसे उग्र प्रदर्शन देखने को मिला था, जब जामिया के छात्रों के साथ पुलिस की झड़प हुई थी और कई लोग घायल हुए थे। वहीं मंगलवार को दिल्ली के सीलमपुर में भी प्रदर्शनकारियों और पुलिस में झड़प देखने को मिली। 


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