Header Ads

  • BREAKING NEWS

    DELHI:सुप्रीम कोर्ट ने CAA पर रोक लगाने से किया इनकार ,4 सप्ताह में केंद्र से माँगा जवाब

    We News 24 Hindi »दिल्ली,एनसीआर 
    राज्य/दिल्ली/ब्यूरो संवाददाता विवेक श्रीवास्तव 

    नई दिल्ली : नागरिकता कानून के खिलाफ याचिकाओं पर आज सुप्रीम कोर्ट में सुनवाई हुई। नागरिकता कानून पर फिलहाल रोक लगाने से सुप्रीम कोर्ट ने इनकार कर दिया। सुप्रीम कोर्ट नागरिकता कानून की संवैधानिक वैधता को चुनौती देने संबंधी याचिकाओं पर सुनवाई के लिए पांच सदस्यीय संविधान पीठ का गठन करेगा। साथ ही सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि वह केंद्र का पक्ष सुने बिना सीएए पर कोई स्थगन आदेश जारी नहीं करेगा। नागरिता कानून को चुनौती देने वाली याचिकाओं पर कोर्ट ने केंद्र को नोटिस जारी कर 4 सप्ताह में जवाब मांगा है और कहा है कि अब अगली सुनवाई 4 सप्ताह बाद होगी।

    ये भी पढ़े-FARIDABAD:युवक के साथ दरिंदगी का मामला सामने आया,ऑफिस के अंदर निर्वस्त्र कर पिटा गया

    सुप्रीम कोर्ट ने याचिकाओं पर फैसला सुनाने तक सभी उच्च न्यायालयों के सीएए संबंधी याचिकाओं पर सुनवाई करने पर भी रोक लगा दी है। दरअसल, प्रधान न्यायाधीश एस ए बोबड़े की अध्यक्षता वाली पीठ सीएए की वैधता को चुनौती देने वाली 143 याचिकाओं पर सुनवाई कर रही है। हालांकि, इसके अलावा सीएए के पक्ष में केंद्र सरकार की भी एक याचिका है।
    सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि ने केंद्र को सीएए की संवैधानिक वैधता को चुनौती देने वाली याचिकाओं पर जवाब देने के लिए चार हफ्ते का वक्त दिया है। साथ ही कोर्ट ने कहा कि सीएए का विरोध कर रहे याचिकाकर्ताओं को किसी भी तरह की अंतरिम राहत देने संबंधी आदेश चार हफ्ते बाद ही जारी किया जाएगा। फिलहाल इस पर किसी तरह की रोक नहीं है। 

    ये भी पढ़े-DELHI: देश के 10 शीर्ष शहरों सबसे प्रदूषित शहर बना झारखंड का ये शहर ,देखे कौन सा शहर किस स्थान पर

    केंद्र की ओर से अटॉर्नी जनरल के. के. वेणुगोपाल ने पीठ को बताया कि 143 याचिकाओं में से करीब 60 की प्रतियां सरकार को दी गई हैं। उन्होंने कहा कि सीएए की संवैधानिक वैधता को चुनौती देने वाली उन याचिकाओं पर जवाब देने के लिए सरकार को समय चाहिए जो उसे अभी नहीं मिल पाई हैं।
    वरिष्ठ अधिवक्ता कपिल सिब्बल ने उच्चतम न्यायालय से सीएए के क्रियान्वयन पर रोक लगाने और राष्ट्रीय जनसंख्या रजिस्टर (एनपीआर) की कवायद फिलहाल टाल देने का अनुरोध किया था।
    आईयूएमएल ने अपनी याचिका में कहा कि सीएए बराबरी के मौलिक अधिकार का उल्लंघन करता है और इसका मकसद धर्म के आधार पर लोगों को बाहर कर अवैध शरणार्थियों के एक वर्ग को नागरिकता देना है। कांग्रेस नेता जयराम रमेश द्वारा दायर याचिका में कहा गया है कि यह कानून संविधान के तहत दिए गए मौलिक अधिकारों पर 'कठोर' हमला है ।

    ये भी पढ़े-DELHI:आप पार्टी नामांकन की प्रक्रिया के समाप्त होते ही प्रचार अभियान किया तेज,गारंटी कार्ड लेकर घर-घर जाएंगे कार्यकर्ता

    राजद नेता मनोज झा, तृणमूल कांग्रेस सांसद महुआ मोइत्रा, एआईएमआईएम नेता असदुद्दीन ओवैसी ने भी सीएए की संवैधानिक वैधता को चुनौती देते हुए कई याचिकाएं दायर की हैं। कई अन्य याचिकाकर्ताओं में मुस्लिम संस्था जमीयत उलेमा-ए-हिंद, ऑल असम स्टूडेंट्स यूनियन (आसू), पीस पार्टी, भाकपा, एनजीओ 'रिहाई मंच और सिटिजंस एगेंस्ट हेट, वकील एम एल शर्मा और कानून के छात्र शामिल हैं।


    क्या है नागरिकता कानून
    संशोधित कानून के अनुसार धार्मिक प्रताड़ना के चलते 31 दिसंबर 2014 तक पाकिस्तान, बांग्लादेश और अफगानिस्तान से भारत आए हिन्दू, सिख, बौद्ध, जैन, पारसी और ईसाई समुदाय के लोगों को अवैध प्रवासी नहीं माना जाएगा और उन्हें भारतीय नागरिकता दी जाएगी। राष्ट्रपति रामनाथ कोविन्द ने गुरुवार की रात नागरिकता (संशोधन) विधेयक 2019 को स्वीकृति प्रदान कर दी थी जिससे यह कानून बन गया था।

    मामले से जुड़ी अहम जानकारियां :
    1. सुप्रीम कोर्ट में 144 याचिकाओं को लेकर CJI एसए बोबडे, जस्टिस संजीव खन्ना और जस्टिस एस अब्दुल नज़ीर की बेंच ने सुनवाई की.
    2. कपिल सिब्बल ने कहा, पहले ये तय हो कि इसे संविधान पीठ भेजा जाना है या नहीं. हम रोक नहीं मांग रहे लेकिन इस प्रक्रिया को तीन हफ्ते के लिए टाला जा सकता है.
    3. मनु सिंघवी ने कहा, नागरिकता देने की प्रक्रिया शुरू हो चुकी है. यूपी में 30 हजार लोग चुने गए हैं. फिर कपिल सिब्बल बोले, इसी मुद्दे पर जल्द फरवरी में कोई तारीख सुनवाई के लिए तय हो.
    4. CJI ने कहा, फिलहाल हम सरकार को प्रोविजनल नागरिकता देने के लिए कह सकते हैं. हम एकपक्षीय तौर पर रोक नहीं लगा सकते.
    5. याचिकाकर्ता ने कहा, बंगाल और असम विशिष्ट राज्य हैं. असम में बांग्लादेशियों का मुद्दा है. इनमें आधे बांग्लादेश से आने वाले हिंदु हैं और आधे मुस्लिम. असम में 40 लाख बांग्लादेशी हैं. इस कानून के तहत आधे ही लोगों को नागरिकता मिलेगी. ये पूरी डेमोग्राफी को बदल देगा. इसलिए सरकार को फिलहाल कदम उठाने से रोका जाना चाहिए.
    6. इस पर CJI ने कहा, ये अहम है कि क्या हमें 99 फीसदी याचिकाकर्ताओं को सुनना चाहिए और इसके बाद आदेश जारी करना चाहिए. अगर केंद्र व कुछ की बात सुनकर हम आदेश जारी करते हैं तो बाकी याचिकाकर्ता कहेंगे कि हमारी बात नहीं सुनी गई.
    7. मनु सिंघवी और कपिल सिब्बल ने कहा, मामले को संविधान पीठ को भेजा जाना चाहिए. कपिल सिब्बल ने कहा, तब तक दो महीने के लिए प्रक्रिया को पोस्टपोन कर दिया जाए. इस पर अटार्नी जनरल ने विरोध किया और कहा ये स्टे होगा. CJI ने कहा, ये केस संविधान पीठ को जा सकता है. हम रोक के मुद्दे पर बाद में सुनवाई करेंगे.
    8. सुप्रीम कोर्ट ने असम से संबंधित याचिकाओं पर जवाब देने के लिए दो हफ्ते का वक्त दिया.
    9. मनु सिंघवी बोले, यूपी में 19 जिलों में 40 लाख लोगों को संदेहजनक बताकर वैरिफाई करने की प्रक्रिया चल रही है. क्या ये लोगों में डर पैदा करने के लिए काफी नहीं है, जो प्रक्रिया 70 सालों में नहीं हुई तो क्या उसे मार्च तक टाला नहीं जा सकता.
    10. सुप्रीम कोर्ट ने सभी मामलों में केंद्र को नोटिस जारी कर जवाब दाखिल करने को कहा. केंद्र ने चार हफ्ते मांगे, सुप्रीम कोर्ट ने कहा, असम और त्रिपुरा के केस अलग हैं. याचिकाकर्ता इनकी एक लिस्ट दें. सुप्रीम कोर्ट ने सभी मामलों में केंद्र को नोटिस जारी कर जवाब दाखिल करने को कहा. कोर्ट ने केंद्र को चार हफ्ते में जवाब दाखिल करने को कहा.
    1.        गौतम कुमार द्वारा किया गया पोस्ट 

    WE NEWS 24 AID

    Post Bottom Ad