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    NEW DELHI:सुरक्षा के लिए दिए गए चेक बाउंस होने पर नहीं होगी 138 के तहत कार्रवाई

    We News 24 Hindi »नई दिल्ली     

    संवाददाता काजल कुमारी  

    नई दिल्ली : यह सभी जानते होंगे कि चेक बाउंस होने पर सख्त सजा का प्रावधान है। हालांकि, यह कम लोगों को ही मालूम होगा कि हर मामले में चेक बाउंस होने पर सजा नहीं दी सकती।

    इंस्टीट्यूट ऑफ कंपनी सेक्रेटरी ऑफ इंडिया (आईसीएसआई) के पूर्व चेयरमैन अंकुर श्रीवास्तव ने बताया कि  चेक बाउंस के लिए नेगोशिएबल इंस्ट्रूमेंट्स एक्ट, 1881  है। इसके सेक्शन 138 के मुताबिक, कोई स्वीकार्य देनदारी भुगतान के लिए जारी किया गया चेक ही बाउंस होने पर कार्रवाई के दायरे में आएगा। यानी आपको किसी के रुपये लौटाने हैं या कोई भुगतान करना स्वीकार किया है, उस मामले में चेक बाउंस होने पर केस दर्ज नहीं किया जा सकता है।

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    सिर्फ एक सूरत में दर्ज होगा मामला
    अंकुर श्रीवास्तव ने बताया कि दो पार्टियों के बीच लेन-देन या कारोबार चेक से हुआ हो,  उसके बाउंस होने पर सेक्शन 138 के तहत कार्रवाई होगी।  किसी व्यक्ति ने दोस्त की मदद के लिए उसे पैसा दिया और वह वापस करने के लिए चेक देता है और वह बाउंस हो जाता है, तो इस मामले में मामला दर्ज नहीं होगा।  क्योंकि मदद के लिए दिया गया पैसा लोन यानी उधार माना जाता है।

    सुरक्षा के लिए दिए गए चेक बाउंस होने पर नहीं होगी कार्रवाई

     आप कोई कारोबार कर रहे हैं और आपने किसी व्यक्ति से सामान खरीदा, तो आपको उसके पास सुरक्षा (सिक्योरिटी)के तौर पर कुछ रखना होगा। सिक्योरिटी के तहत दिए इस चेक को दूसरी पार्टी ने कैश कराने की कोशिश की और चेक बाउंस हो गया तो केस नहीं बनेगा।

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     इन मामलों में नहीं होगी कार्रवाई

    -अगर चेक एडवांस के तौर पर दिया गया है
    -अगर चेक सिक्योरिटी के तौर पर दिया गया है
    -अगर चेक में नंबर और शब्दों में लिखा गया अमाउंट अलग-अलग है
    -अगर चेक किसी चैरिटेबल संस्था को गिफ्ट या डोनेशन के तौर पर दिया गया है
    -अगर चेक विकृत अवस्था में मिलता है

    चेक बाउंस होने पर क्या करें
    चेक बाउंस होने के 30 दिन के अंदर चेक देने वाली पार्टी को कानूनी नोटिस भेजना होगा। इसमें चेक बाउंस होने की सूचना देने के साथ-साथ ब्याज सहित रकम वापसी की मांग करनी होगी। नोटिस रजिस्टर्ड पोस्ट से भेजना होगा, क्योंकि कोर्ट को रिसीविंग की सूचना देनी होती है। दूसरी पार्टी नोटिस मिलने के 15 दिनों के अंदर आपको पैसे लौटाने के लिए बाध्य है। ऐसा नहीं करने पर एक महीने के अंदर कोर्ट में चेक बाउंस की शिकायत दर्ज करा सकते हैं।

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    धारा 138 पर कानूनी सलाह की आवश्यकता है

    1. मैंने एक व्यक्ति को 3 साल पहले व्यवसाय की ज़मानत राशि का चैक दिया था।
    2. अब उसने अपने आप चैक पर दिनांक और राशि भर कर आहरण के लिए बैंक की शाखा में गया।
    3. बैंक ने "अपर्याप्त शेष राशि के कारण" के मेमो द्वारा चैक वापस कर दिया।
    4. अब उन्होंने 4 साल बाद कोर्ट में धारा 138 के तहत मामला दायर किया है।
    5. यद्यपि सभी व्यावसायिक शर्तों का निपटारा हो गया था, लेकिन अब वह इसे अपने व्यक्तिगत लाभ और हमें ब्लैकमेल करने के लिए प्रयोग कर रहा है।
    नोट: - उसके पास मेरी तरफ किसी भी ऋण या दायित्व का कोई प्रमाण नहीं है I और न ही मेरे पास कोई ज़मानत राशि के रूप में दिए गए चेक के प्रमाण हैं।
    उत्तर

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    इस कानूनी प्रावधान की भाषा बहुत स्पष्ट है चेक की अस्वीकृति का अपराध केवल तभी माना जाता है जब चेक किसी भी ऋण या अन्य देनदारी के निर्वहन के लिए जारी किया गया हो। यदि चेक " ज़मानत राशि " के रूप में जारी किया गया था, और अगर इस तरह का चेक बाउंस करता है, तो एन. आई. एक्ट की धारा 138 के तहत कोई अपराध नहीं है। इसके अलावा आपकी तरफ कोई ऋण या देयता का कोई सबूत उनके पास नहीं है।

    आपका मामला परीक्षण के लिए एक उपयुक्त मामला है। किसी तकनीकी दोष को छोड़कर, मजिस्ट्रेट के समन प्राप्त होने पर, उच्च न्यायालय या सर्वोच्च न्यायालय के समक्ष किसी मामले को दाखिल करके कुछ भी नहीं मिलेगा। सबसे अच्छी संभव कार्रवाई दूसरी पार्टी को चेक के दुरुपयोग, आईपीसी की धारा 465, 467, 468 और 471 के तहत "जालसाजी" और धारा 385 के तहत ब्लैकमेलिंग के लिए उसके खिलाफ मामला दायर करने के लिए कानूनी नोटिस देना है। यदि वह 138 के तहत मामला दर्ज करता है, तो उस कानूनी नोटिस के आधार पर मामले को चुनौती देने का सबसे अच्छा संभव तरीका है। चेक बुक नंबर के रूप में आपके पास पर्याप्त प्रमाण होंगे। और चेक बुक की एक ही श्रृंखला के अन्य चेक ठीक से कहानी बताएंगे। लेकिन अन्य किसी भी तरह की प्रतिरक्षा के बारे में अन्य पार्टी को खुलासा न करें। आप एक अच्छे वकील से परामर्श लें, जो निश्चित रूप से आपको उचित व्यय पर सर्वोत्तम सलाह देगा।

    आर्यन कुमार द्वारा किया गया पोस्ट 

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