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    SITAMARHI:डीएम अभिलाषा कुमारी शर्मा ने जागरूकता रथ को समाहरणालय से किया गया रवाना,देखे वीडियो

    We News 24 Hindi »सीतामढ़ी,बिहार 
    राज्य/सीतामढ़ी/ब्यूरो संवाददाता पवन साह  

    सीतामढ़ी:यदि पूरी हो तैयारी, रुकेगी बीमारी,डीएम अभिलाषा कुमारी शर्मा ने जागरूकता रथ को समाहरणालय से किया गया रवाना जिलाअधिकारी अभिलाषा कुमारी शर्मा ने कहा अगर हम अभी से ही पूरी तैयारी करें, तो निश्चित रूप से मष्तिष्क ज्वर को काबू में कर सकते है। 

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    समाहरणालय परिसर से डीएम अभिलाषा कुमारी शर्मा द्वारा मस्तिष्क ज्वर की रोकथाम हेतू जागरूकता रथ को झंडा दिखा कर रवाना किया गया ।   20  से 27 जनवरी तक यह रथ जिला के विभिन्न क्षेत्रों में कार्य योजना अनुसार श्रव्य-दृश्य माध्यम से मस्तिष्क ज्वर की रोकथाम हेतु जागरूकता संदेश जन जन तक पहुंचानेे का काम करेगी।

    विदित हो कि जापानी इनसेफलाइटिस से रोकथाम हेतु 21 जनवरी से जिला में 1 से 15 वर्ष तक के सभी बच्चों को जापानी इनसेफलाइटिस का टीकाकरण किया जायेगा जिसमें 1138000 बच्चों को टीका लगाने का लक्ष्य रखा गया है ।

    रथ को रवाना करते हुए जिला पदाधिकारी द्वारा बताया गया कि रथ जिला के कोने कोने में जाकर समुदाय के बीच मस्तिष्क ज्वर, इससे बचने के उपाय तथा हो जाने पर  प्राथमिक उपचार एवं त्वरित रेफरल के   बारे मे जानकारी फैलाने का कार्य करेंगे। लोगो से अनूरोध किया जाएगा कि अन्धविश्वध यथा ओझा, भक्ता आदि के चक्कर में समय बर्बाद न कर शीघ्र अस्पताल में भर्ती  करवाये। उन्होंने बताया 21 जनवरी को समाहरणालय सभागार में मस्तिष्क ज्वर की रोकथाम हेतु तैयारीकी समीक्षा भी स्वास्थ्य, शिक्षा, समेकित बाल विकास सेवा एवं समबन्धित विभाग के साथ की जायेगी । डीएम ने कहा कि सभी संबंधित विभाग को अभी से ही पूरी तैयारी में गम्भीरता के साथ लग जाने का निर्देश दिया गया है  ताकि  इस बीमारी का पूर्ण रूप से रोक थाम करने में सफल हो। सके।

    क्या है मष्तिष्क ज्वर लक्षण

    मस्तिष्कशोथ के लक्षण अस्पष्ट होते हैं, लेकिन डॉक्टरों का कहना है कि इससे दिमाग में ज्वर, सिरदर्द, ऐंठन, उल्टी और बेहोशी जैसी समस्याएं पैदा हो जाती हैं। रोगी का शरीर निर्बल हो जाता है। वह प्रकाश से डरता है। कुछ रोगियों (बहुत कम) के गर्दन में जकड़न आ जाती है। डॉक्टरों के मुताबिक यहां तक कि रोगी लकवा के भी शिकार हो जाते हैं। ये सभी लक्षण मस्तिष्क की सुरक्षा प्रणाली के क्रियाशील (ऐक्टिव) होने के कारण प्रकट होते हैं क्योंकि सुरक्षा प्रणाली संक्रमण से मुक्ति पाने के लिये क्रियाशील हो जाती है।

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    रोग के कारक

    यह रोग एक प्रकार के विषाणु (वायरस) से होता है। यह विषाणु इतने सूक्ष्म होत हैं कि साधारण सूक्ष्मदर्शी (माइक्रोस्कोप) से भी नहीं देखे जा सकते हैं। इस रोग का वाहक मच्छर किसी स्वस्थ्य व्यक्ति को काटता है तो विषाणु उस व्यक्ति के शरीर में प्रवेश कर जाते हैं और लगभग 4 दिन से चौदह दिन के अन्दर उस व्यक्ति में इस रोग के लक्षण दिखने लगते हैं।


    रोकथाम

    मच्छरों से बचाव व टीकाकरण ही इस बीमारी से बचने का उपाय है। इसका टीका काफी प्रभावी है और इसका कोई साइड इफेक्ट नहीं है।

    1.        दिव्यांश राणे द्वारा किया गया पोस्ट 

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