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    BREAKING:हेड कॉन्स्टेबल रतनलाल की मौत पर बड़ा खुलासा पत्थर लगने से नहीं गोली लगने से हुयी मौत

    We News 24 Hindi »दिल्ली/राज्य
    NCR/दिल्ली/ब्यूरो/संवाददाताअंजलि कुमारी 

    नई दिल्ली : नागरिकता कानून के विरोध में  पूर्वी दिल्ली के चांदबाग में सोमवार को हुई हिंसा के दौरान गोकलपुर के एसीपी के रीडर रतन लाल की मौत पत्थर लगने से नहीं हुई थी, बल्कि गोली लगने से उनकी जान गई थी। दूसरे दिन ऑटोप्सी रिपोर्ट से पता चला है कि रतन लाल के शरीर में गोली थी। इस गोली को ऑटोप्सी के दौरान निकाला गया। 

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    गौरतलब है कि सोमवार को पूर्वी दिल्ली के चांदबाग में हिंसक प्रदर्शन को नियंत्रित करने के दौरान गोकलपुर के एसीपी के रीडर रतन लाल शहीद हो गए।
    घटनाक्रम के मुताबिक, अमित शर्मा प्रदर्शनकारियों के बीच घिर गए। उन पर लाठी-डंडों से हमला होने लगा। इस यह देख मौके पर मौजूद रतन लाल बचाने के लिए पहुंचे। इसी दौरान उनके सिर पर एक बड़ा पत्थर आकर लगा। इसके बाद उपद्रवियों ने उनकी पिटाई भी कर दी। 

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    इस दौरान कई अन्य पुलिसकर्मियों पर भी हमला हुआ। बाद में पहुंचे अतिरिक्त बल ने सभी घायलों को अस्पताल पहुंचाया। जहां रतन लाल को मृत घोषित कर दिया गया। वहीं अमित शर्मा व तीन सब इंस्पेक्टरों को मैक्स अस्पताल में भर्ती कराया गया है।पुलिस अधिकारियों के मुताबिक अमित शर्मा के सिर में गंभीर चोटें आई हैं। इसके साथ उनके हाथ में फ्रैक्चर भी है। उन्हें न्यूरो विभाग के आइसीयू भर्ती किया गया है। वहीं तीन सब इंस्पेक्टरों की हालत भी गंभीर बताई जा रहा है। 

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    इसके अलावा दस से अधिक पुलिसकर्मी जीटीबी अस्पताल में भर्ती हैं। पुलिस अधिकारियों ने बताया कि रतन लाल के शव को पोस्टमार्टम के लिए जीटीबी अस्पताल में मोर्चरी में रखा गया है। मूलरूप से सीकर, राजस्थान के रहने वाले रतन लाल 1998 में दिल्ली पुलिस में बतौर कांस्टेबल भर्ती हुए थे। उनकी पत्नी और दो बच्चे बुराड़ी में रहते हैं।
    गौरतलब है कि दिल्ली के विभिन्न इलाकों में नागरिकता संशोधन कानून और राष्ट्रीय नागरिकता रजिस्टर के विरोध में रविवार से प्रदर्शन चल रहा है। 

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