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    COVID_19:समय की बात है गेंहू का कर्ज भारत अमेरिका को गोली से चुकाएगा

    We News 24 Hindi »दिल्ली/राज्य
    NCR/ब्यूरो संवाददाता विवेक श्रीवास्तव

    नई दिल्ली :समय-समय  की बात है। कभी अमेरिका से भारत ने अनाज की मदद मांगी थी। और आज भारत से  कोरोना के खिलाफ जंग में हाइड्रॉक्सीक्लोरोक्वीन की मदद अमेरिका ने मांगी है |कोविड-19 ने अमेरिका जैसे सुपर पावर वाली देश को भी घुटनों के बल झुका दिया है। लगतार हो रही सैंकड़ों मौत से परेशान अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने भारत से हाइड्रॉक्सीक्लोरोक्वीन दवा के लिए मदद मांगी है । 

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    1951 में तत्कालीन प्रधानमंत्री नेहरू अमेरिका से मदद माँगा था 
    1951 में देश अनाज की कमी से जूझ  रहा था तब के प्रधानमंत्री जवाहरलाल नेहरू ने  अमेरिका से मदद मांगी थी। तब 12 फरवरी 1951 तब के अमेरिकी राष्ट्रपति हैरी एस ट्रूमैन ने भारत को अनाज की कमी से निपटने के लिए भारत को 20 लाख टन आपात मदद देने की अनुशंसा की थी। उन्होंने कहा था की 'हम भारत की अपील पर बहरे नहीं बन सकते हैं।

    तत्कालीन US राष्ट्रपति ट्रूमैन ने भरी थी हामी 
    तत्कालीन अमेरिकी राष्ट्रपति ट्रूमैन ने कहा था, 'भारत के लोगों के प्रति हमारी दोस्ती और लोगों को भूखे नहीं रहने देने की हमारी चिंता ही हमें यह कदम उठाने को प्रेरित कर रही है।' हालांकि उस समय अमेरिकी राष्ट्रपति के संदेश को भारत की अनाज की कमी को दूर करने के मानवीय आधार पर देखा गया लेकिन ट्रूमैन और उनके सलाहकारों का मानना था कि नई दिल्ली के आग्रह पर तुरंत प्रतिक्रिया व्यक्त करने से दोनों देशों के बीच अच्छे रिश्ते भी बनेंगे। 

    नेहरू के इन सिद्धांतों से चिढ़ता था अमेरिका 
    अमेरिका भारत के प्रधानमंत्री जवाहरलाल नेहरू के गुटनिरपेक्षता के सिद्धांत से चिढ़ता था। इसके अलावा चीन को लेकर भारत की नीति, कोरियाई युद्ध, पश्चिम उपनिवेशवाद और अन्य मुद्दों पर भारत के रुख अमेरिका और नई दिल्ली के बीच रिश्तों को मनमुटाव बढ़ा रहा था । 

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    अमेरिका अपने स्वार्थ के लिए भारत की मदद 
    ट्रूमैन को लगा था कि भारत को अनाज संकट के दौरान मदद करके उसे अहसास दिलाया जा सकता है कि नई दिल्ली का असली हित पश्चिमी देशों संग है। अमेरिकी कांग्रेस ने लंबी बहस के बाद भारत को अनाज भेजने को राजी हुए थे । 


    और आज वक्त बदल गया 
    1951 से लेकर 2020 तक तक़रीबन 70 सालों में बहुत कुछ बदल गया। जो भारत कभी मदद का मोहताज था आज वो अपने खाद्यान उत्पादन बढ़ चुका है और अपने आप में आत्मनिर्भर है । लेकिन समय का पहिया घूम गया और अब विपरीतं हो रहा है । अमेरिका को भारत के आगे  एक दवा के लिए हाथ फैलाना पर रहा है और भारत उसे बहुत जल्द दवा अमेरिका को भेजेगा ।

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    ट्रंप भारत की की वाह वाही कर रहा है 
    कोरोना महामारी के भयानक संकट के दौर से गुजर रहे अमेरिका को हाइड्रॉक्सीक्लोरोक्वीन के निर्यात को भारत सरकार की मंजूरी मिलने के बाद पीएम मोदी की तारीफ कर रहे हैं। ट्रंप काफी खुश हैं। बुधवार को ट्वीट कर ट्रंप ने भारत के प्रति अपनी कृतज्ञता जाहिर की। उन्होंने पीएम मोदी और भारतीय लोगों का धन्यवाद करते हुए अपने ट्वीट में कहा कि भारत की इस मदद को भुलाया नहीं जाएगा। माना जा रहा है कि मलेरिया की यह दवा कोरोना से लड़ने में कारगार है। हालांकि न तो वैज्ञानिक और न ही डॉक्टर इस बात की पुष्टि कर रहे हैं। 

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