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    लॉक डाउन की बजह से ईख के खेती करने वाले किसानों का हुआ बूरा हाल,भुखमरी की उत्पन्न हुई स्थिति।

    We News 24 Hindi »बिहार/राज्य
    बिहटा /ब्यूरो संवाददाता वशिष्ठ कुमार की रिपोर्ट

    नौबतपुर : इस बार की गर्मी के मौसम में लोगो के गले तक नही पहुच पाएगी गन्ने का जूस ।जी हाँ ये हम नही कह रहे गन्ने के खेती करने वाले किसान कह रहे हैं बताते चले कि लॉक डाउन के वज से इस बार की ईख की खेती पर काफी असर पड़ा है राजधानी पटना से सटे नौबतपुर प्रखण्ड के छितनी  एवं पलटू छतनी गांव का है जहाँ पूरा गांव ईख के खेती और उससे जुड़े व्यवसाय से उनका जीवन चलता है। 

    लेकिन इस बार कोरोना के वज से  लॉक डाउन के कारण  सही समय पर ईख की फसल  न कटने की वजह से ईख खेत मे  ही सुख कर जलावन के काम में  आ रहे हैं यहां तक जो किसान पैसे पर खेत खरीदकर फसल लगाए  उनकी चिंता सता रही है कि अब पैसा से लिया खेत और फसल भी बर्बाद हो गया तो अब कैसे इनका जीवन चलेगा उनकी मांग है कि सरकार उन्हें मुआवजा दे यहां तक जो किसान खेत से काट कर मशीन के जरिए गले का जूस  निकालकर लोगों को पिलाती थी वह भी मशीन जंग लगने के कगार पर हो गया है |

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    पिछले लगभग 2 महीने से मशीन भी बंद है और इस बंदी की वजह से इन लोगों का परिवार का भुखमरी की स्थिति पर आ गई है यहां तक कई किसानों ने मशीन किश्ती पर ले रखी थी और लॉक डाउन  की वजह से  सभी मशीन बंद होने से अब बैंक वाले परेशान कर रहे हैं सही समय पर किस्त जमा ना हो पाया तो मशीन भी अंत में बैंक वाले को देना पड़ेगा आपको बता देगी नौबतपुर का यह एकमात्र गांव जो ईख के खेत पर निर्भर है और उससे जुड़े व्यवसाय इस गांव के सभी लोग का यही पेशा है जब से देश में लॉक डाल लगाया गया तब से यह लोग मशीन के साथ साथ खेती पर भी काफी बुरा असर पड़ा है कई किसान की तो चिंता बढ़ गई है कि जो पैसे से खेती किए थे वह पैसा भी नहीं निकल पाया और फसल बर्बाद हो गया कई। 


    वही ईख व्यवसाई करने वाले रामअवतार महतो ने बताया कि जब से देश में लॉक डाउन लगा है इसके वजह से सारे मशीन भी बंद हो चुके हैं और अब ऐसा हालत हो गया कि भुखमरी की नौबत आ चुकी है सरकार की छूट में उनकी यह भी मांग की हम लोगों को भी कुछ छूट दिया जाए ताकि हमारा भी परिवार सही तरीके से चल सके। 

    यहां तक वह भी 3 बीघा में ईख का फसल लगाए थे लेकिन सभी एक सही समय पर ना कटने की वजह से सूख गया और अब जलावन के काम में आ रहा है वही किसान में लालमोहन नोनिया एवं रामनाथ कुमार ने बताया कि पैसा देकर खेत लिया था और ईख का फसल लगाया था लेकिन इस बार जो हालात है इसके वजह से ईख का फसल तो बर्बाद हो चुका है लेकिन ईख से जो भी मशीन चलते थे और बाजार में गन्ने का जूस बिकता था वह भी बंद हो चुका है यहां तक जो मशीन किश्ती पर लिए थे उसकी किस्त कैसे भरपाई होगा यह तो भगवान जाने उनकी यह भी मांगे हैं कि जो भी फसल बर्बाद हुए हैं उनकी सरकार मुआवजा दें ताकि उनका भी परिवार इस घड़ी में सुखी से रह सके नहीं तो भुखमरी की स्थिति उत्पन्न  हो जाएगी ।

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