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    कोलकाता:लॉकडाउन के कारण मजदूरों की कमी से उपभोक्ता सामान की आपूर्ति में कमी

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    कोलकाता/ब्यूरो संवाददाता विष्णु पात्रा

    कोलकाता:लॉकडाउन के कारण मजदूरों की कमी से उपभोक्ता सामान (एफएमसीजी) कंपनियां आपूर्ति श्रृंखला की गड़बडिय़ों से जूझ रही हैं। आवश्यक सामान की ढुलाई करने वाले ट्रकों के पहिए थमे हुए हैं। प्रमुख कंपनियां सहित बाजार के सूत्र बताते हैं कि सामान की ढुलाई करने वाले वाहनों की आवाजाही अब भी प्रभावित है। हजारों ट्रक अंतरराज्यीय सीमा राजमार्गों पर अटके हुए हैं। विनिर्माण और खुदरा दोनों की आपूर्ति पर इसका गंभीर प्रभाव पड़ा है।
    फ्रेंड्स' ब्रांड बनाने वाली कंपनी नोबेल हाइजीन के उपाध्यक्ष कार्तिक जौहरी कहते हैं कि आवश्यक सामान ढोने वाले परिवहन के संबंध में राज्य-स्तरीय अधिकारियों के बीच पर्याप्त समन्वय नहीं है।



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    ट्रकों की आवाजाही घटी
    पश्चिम बंगाल के प्रमुख परिवहन ऑपरेटर के अनुसार अन्य दिन राज्य के राजमार्गों पर दो से तीन लाख ट्रक चलते हैं। इसमें बंगाल में आने और जाने वाले ट्रक के साथ ही सड़क पर खड़े ट्रक भी शामिल हैं लेकिन जब से लॉकडाउन लागू हुआ है तब से राज्य में रोजाना 20 से 25 हजार से अधिक ट्रक नहीं चल रहे हैं। लगभग 50 हजार वाहन विभिन्न राज्यों के सीमावर्ती क्षेत्रों और डिपो में रुके हुए हैं या राजमार्गों में फंसे हुए हैं। राष्ट्रीय स्तर पर लगभग एक लाख ट्रक राज्य की सीमाओं पर अटके हुए हैं।


    चल रही है बातचीत
    फेडरेशन ऑफ वेस्ट बंगाल ट्रक ऑपरेटर्स एसोसिएशन के सचिव प्रबीर चटर्जी ने बताया कि ट्रकों की आवाजाही में समस्याएं हो रही हैं और सामान्य स्थिति में लौटने में अभी भी दो से पाँच दिन लगेंगे। हम पुलिस के साथ समन्वय कर रहे हैं और विभिन्न परिवहन संघों से भी संपर्क कर रहे हैं ताकि ट्रकों का आवागमन सुमगता से हो सके। ऑपरेटरों का कहना है कि पहले दो हफ्तों में 10 हजार ट्रक सड़कों पर नहीं थे। अधिकतर चालकों और सहायकों को बीच में छोड़ दिया गया था।

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    सामान्य से स्थिति कोसों दूर
    एफएमसीजी क्षेत्र की बड़ी कंपनियों के प्रतिनिधि कह रहे हैं कि एक कंपनी ई-पास प्राप्त कर माल की आवाजाही सुनिश्चित कर सकती है। लेकिन पिछली खेपों का क्या होगा, जिसमें ये पास नहीं हैं। वे कहते हैं कि वाहनों की आवाजाही के लिए अनुमति लेना कठिन काम है।

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    और कदम उठाने होंगे
    डाबर इंडिया के निदेशक (संचालन) शाहरुख खान के अनुसार ट्रकों की आवाजाही को आसान बनाने के लिए केंद्र और राज्य सरकारों को और कदम उठाने चाहिए। उन्होंने कहा कि स्थिति सामान्य से बहुत दूर है। कंपनियों को घरेलू मांग और निर्यात प्रतिबद्धताओं को पूरा करने के लिए कठिनाइयों का सामना करना पड़ रहा है।


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