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    Lockdown: नित नये फरमान से राशनडीलर की मुश्किल में जान,डीलर अपना लाइसेंस सरेंडर करने पर मजबूर

    We News 24 Hindi »दिल्ली/राज्य
    NCR/ब्यूरो संवाददाता कोमल कुमार 

    नई दिल्ली: खाद्य एवं आपूर्ति विभाग की ओर से रोजाना कोई ना कोई नया फरमान कोटा धारकों के लिए जारी किया जा रहा है, जिसके चलते कई कोटाधारक अपना लाइसेंस सरेंडर करवाने के बारे में सोच रहे हैं। ऐसे में अब एक नए फरमान ने कोटाधारकों की सांस अटका दी है। दरअसल विभाग के नए स्पेशल कमिश्नर की ओर से एक आदेश पारित किया गया है जिसमें मई माह से रोजाना ऑनलाइन विभागीय वेबसाइट पर खाद्यान्न कितना बेचा गया व कितना बाकी सहित अन्य विवरण भरकर देने होंगे।

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    जबकि राजधानी के अधिकतर कोटाधारक जोकि कम पढे-लिखें हैं और कंम्यूटर, स्मार्टफोन प्रयोग नहीं करते उन्हें आदेश के बाद ही पसीना आने लगा है। बता दें कि आदेशानुसार प्रत्येक कोटाधारक को अपने राशन के दुकान से लिंक कुल कार्डों की जानकारी सहित यह भी बताना होगा कि उसने जिस दिन से राशन बांटना शुरू किया तब उसके पास कितना स्टाॅक था, इस दौरान लाभार्थियों व बांटे गए खाद्यान्न की डिटेल, क्लोजिंग स्टाॅक की डिटेल भरकर विभागीय वेबसाइट पर अपलोड करनी होगी।


    यह प्रक्रिया काफी जटिल है जिसके चलते कोटाधारकों में असंतुष्टी का माहौल है। मालूम हो कि यह काम सर्किल के फूड एंड सप्लाई ऑफिसर (एफएसओ) व फूड एंड सप्लाई इंस्पेक्टर (एफएसआई) द्वारा किया जाता है। सिर्फ पर्ची काटना और मैन्यूअली स्टाॅक व सेल रजिस्टर तैयार करने की जिम्मेदारी कोटाधारकों की होती है। कोटाधारकों का कहना है कि विभाग अपने अधिकारियों द्वारा किए जाने वाला काम भी अब कोटाधारकों से ले रहा है जोकि हमारी समझ में नहीं आएगा क्योंकि हम लोगों में से 80 से 90 फीसदी कोटाधारक दसवीं पास हैं और 50 से 55 की उम्र के हैं। उनका कहना है कि उन्हें स्मार्ट फोन प्रयोग करने नहीं आता और जबसे कोरोना वायरस से सहायक संक्रमित हुआ है परिवार राशन की दुकान सरेंडर करने का दबाव बना रहा है।

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    विभाग प्रक्रिया को अधिक बना रहा है जटिल 
    दिल्ली सरकारी राशन डीलर्स संघ के सचिव सौरभ गुप्ता व पब्लिक डिस्ट्रीब्यूशन सिस्टम वेलफेयर एसोसिएशन के अध्यक्ष शैलेंद्र कुमार का कहना है कि जब दैनिक रिपोर्ट सर्किल स्तर पर एफएसओ द्वारा टेलिफोनिक ली जा रही है फिर विभाग लगातार सार्वजनिक वितरण प्रणाली को इतना जटिल क्यों बना रहा है। अधिकतर कोटाधारकों के पास बेसिक फोन है और तकनीकी तौर पर कमजोर हैं। वहीं कोरोना के डर से घर के सभी सदस्य इस काम को करने से मना कर रहे हैं ऐसे में वो अपने परिवार के सदस्यों की मदद से भी यह फार्म नहीं भरवा पाएंगे। अब राशन वाला राशन वितरित करे या ओंनलाइन प्रफार्मा भरकर विभाग को भेजे।

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