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    हिमाचल:सर्वेलॅन्स साॅफ़्टवेयर से निग़रानी बढ़ाने में मिली मदद


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    कांगड़ा/रिपोर्टर सत्यदेव शर्मा सहोड़

    धर्मशाला(कांगड़ा)।कांगड़ा ज़िला प्रशासन द्वारा राष्ट्रीय सूचना विज्ञान केन्द्र (एनआईसी) के सहयोग से विकसित एचपी-एंट्री-कम-सर्वेलॅन्स साफ़्टवेयर के माध्यम से ज़िला में प्रवेश करने वाले तथा होम क्वारंटाइन में रखे गए व्यक्तियों पर निग़रानी रखने में मदद मिल रही है। इस साफ़्टवेयर के माध्यम से प्रशासन उन व्यक्तियों पर भी नज़र रख रहा है, जो होम क्वारंटाइन के निर्देशों का उल्लंघन करते हैं। देशव्यापी लाकडाउन के दौरान इस साॅफ़्टवेयर को विकसित करने का उद्देश्य ज़िला से बाहर जाने वाले तथा देश के  अन्य भागों से ज़िला में आने वाले व्यक्तियों को दो प्रकार की ई-सेवाएं मुहैया करवाना है। प्रथम ई-सेवा के तहत उन लोगों को कोविड-19 पास उपलब्ध करवाए जा रहे हैं, जो ज़िला के भीतर, ज़िला से बाहर या प्रदेश में आवश्यक कार्य के लिए जाना चाहते हैं; दूसरी सेवा के माध्यम से उन व्यक्तियों को सुविधा प्रदान की जा रही है जो बाहरी राज्यों से ज़िला में प्रवेश चाहते हैं। यह सेवा ऐसे सभी व्यक्तियों की निग़रानी करने में मदद भी प्रदान कर रहा है।


    इस साफ़्टवेयर के ज़रिए लोगों को तीन प्रकार के पास मुहैया करवाए जा रहे हैं। इसका कार्यप्रवाह ई-मेल, एसएमएस तथा आरोग्य सेतु ऐप से समन्वित है। राज्य से बाहर जाने वाले पास श्रेणी के आवेदन ज़िला दंडाधिकारी जबकि राज्य एवं ज़िला श्रेणी के आवेदन सम्बन्धित एसडीएम के एकाउन्ट में चले जाते हैं। इन सेवाओं का लाभ लेने के लिए व्यक्ति एनआईसी वेबसाइट एचटीटीपीएसः//एचपीकांगड़ाडाटएनआईसीडाटइन/करफ्यूपासकांगड़ा (https://hpkangra.nic.in/curfewpasskangra) पर आवेदन कर सकता है।   

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     सेवा का लाभ लेने वाले व्यक्ति को अपनी पहचान से सम्बन्धित दस्तावेज़ों को यात्रा उद्देश्य के साथ अपलोड करना अनिवार्य है। इस पर दो अतिरिक्त दस्तावेज़ भी अपलोड किए जा सकते हैं। श्रेणी तथा उपश्रेणी, जिनके अन्तर्गत आवेदन किया जा सकता है, पूर्व परिभाषित हैं। ई-पास पर सहयात्रियों और उनकी पहचान को भी अंकित किया जाता है ताकि बैरियर पर वाहन में जाने वाले उन व्यक्तियों पर नज़र रखी जा सके जो मरीज़ को पीजीआई या एम्स, दिल्ली में छोड़ने के लिए जाते हैं। इस आरोग्य सेतु ऐप से लिंक किया गया है।     



    ज़िलाधीश राकेश प्रजापति प्रदत्त सेवा के बारे में बताते हैं कि लोगों की आवाजाही के लिए आरम्भ इस सेवा का महत्वपूर्ण हिस्सा, होम क्वॅर्न्टीन में रखे गए व्यक्यिों पर नज़र रखना है। इससे तमाम एसडीएम को आने वाले लोगों पर नज़र रखने और कोविड-19 के संक्रमण को रोकने में मदद मिलती है। इसमें डिजिलाॅकर के माध्यम ये दस्तावेज़ हासिल किए जा सकते हैं। आवेदक अपने आवेदन की प्रगति पर नज़र रख सकता है। ई-पास जारी होने के तुरन्त बाद इसे आरोग्य सेतु ऐप पर भेज दिया जाता है।आवेदन करते समय व्यक्ति को एसएमएस के अलावा ई-मेल पर आवेदन की स्वीकृति या अस्वीकृति की जानकारी प्राप्त हो जाती है। इस एप्लीकेशन के माध्यम से मुद्रित पास पर क्यूआर कोड होता है; जिसके माध्यम से तमाम ब्यौरे और यथास्थिति का पता लगाया जा सकता है। स्वीकृति पत्र पर फालो-अप और सहायता हेतू नियंत्रण कक्ष के नम्बर अंकित होते हैं। 

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    एचपी-एंट्री-कम-सर्वेलॅन्स साफ़्टवेयर पर एक अतिरिक्त सेवा को संलग्न किया गया है। इसके तहत राज्य से बाहर से अपने या किराए के वाहनों में आने वाले लोगों पर नज़र रखी जाती है। इससे प्रतिदिन राज्य में आने वाले की संख्या सुनिश्चित करने में सहायता मिलती है। वांछित तिथि न मिलने पर व्यक्ति अगली तिथि के लिए आवेदन कर सकता है। 
    उपायुक्त राकेश प्रजापति बताते हैं कि अगर कोई कोरोना पाॅज़िटिव व्यक्ति बाहर से आया है तो उसके तमाम यात्रा वृतान्त के साथ, वाहन डेटाबेस के माध्यम से उसके द्वारा उपयोग में लाए गए वाहन और उसके पंजीकरण संख्या के ब्यौरे सहित उसके द्वारा राज्य में प्रवेश करने की संख्या का पता आसानी से लगाया जा सकता है। इस पूरी जानकारी को सम्बन्धित राज्य से साझा करने से वाहन मालिक के पते सहित उसके सम्पर्क में आए तमाम लोगों की जानकारी अल्प समय में हासिल की जा सकती है।

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