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    सीतामढ़ी शहर में आबादी के अनुसार नहीं हैं शौचालय,लोग अब भी खुले में जाते हैं शौच करने

    • शहर में आबादी के अनुसार नहीं हैं शौचालय, जो हैं वो भी गंदे पड़े, लोग अब भी खुले में जाते हैं शौच करने
    • सार्वजनिक स्थानों पर भी टॉइलट की है कमी

    We News 24 Hindi »बिहार/राज्य

    सीतामढ़ी /संवाददाता रोहित ठाकुर की रिपोर्ट

    सीतामढ़ी : जिला को 2018  में सरकार की तरफ से खुले में शौचमुक्त जिला  का सर्टिफिकेट मिल चुका है, लेकिन इसके बावजूद लोग आज भी खुले में शौच के लिए जाते दिखाई दे जाएंगे। शहर की मार्केट, बस स्टैंड, रेलवे स्टेशन आदि जगहों पर आज भी टॉइलट की कमी है। जो बन कर तैयार हैं उसे नगर परिषद  ने ताला लगाकर बंद कर रखा है। जो चलंत शोचालय है  वो टूटी फूटी अवस्था में । इतना सब होने के बावजूद शहर और जिला को  खुले में शौचमुक्त का सर्टिफिकेट मिल जाना संदेह खड़ा करता है | 

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    यहां है शौचालयों पर ताला

    जिस तरह से शहर को खुले में शौचमुक्त का सर्टिफिकेट मिला है उस हिसाब से शहर में शौचालयों की मात्रा भरपूर होनी चाहिए लेकिन मौजूदा स्थिति ये है कि शहर में वार्ड नंबर 23 में नगर परिषद द्वारा   तकरीबन 10लाख रूपये खर्च कर 12 सीटो वाली शौचालय का निर्माण कराया गया जो 6 माह पूर्व बनकर तैयार हुआ वो आज भी शोभा की वस्तु बनी हुयी है यानि की अभी तक उसे पब्लिक के लिए नहीं खोला गया वंहा ताला लटका हुआ है |

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    नहीं होती साफ-सफाई 

    शहर में कुछ गिने चुने ही टॉइलट है उसकी भी स्थिति खराब है। रख रखाव के अभाव में टॉइलट के अंदर गंदगी भरी हुई है।  वार्ड नंबर 11 लीला साह पुल कोट बाजार स्थित सार्वजनिक शौचालय खंडहर हो चुकी है | नगर परिषद के अतर्गत सीतामढ़ी  शहर का सबसे व्यस्तम जगह बस स्टेंड में स्थित सार्वजनिक शौचालय वो भी जर्जर हो चुकी है |  इसका इस्तेमाल बहुत ही कम लोग करते है। सुबह शाम इसके आस पास लोग खुले में शौच करते दिखाई दे जाएंगे। यहीं नहीं प्रमुख मार्केट में आज भी पब्लिक टॉइलट की कमी है। जैसा की हमने आपको कल अपने खबर में बताया की जो चलंत शोचालय है  वो भी टूटी फूटी अवस्था में खड़ी  है |  स्वक्ष भारत अभियान के तहत इतना लापरवाही और त्रुटी के वावजूद जिला बन गया ODFऔर सीतामढ़ी नगर परिषद् बना नगर निगम ये सोचने वाली बात है |

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    क्या  होता है ODF

    कैसे होता है एक शहर या गाँव  ओडीएफ एक ग्राम पंचायत या एक वार्ड  या शहर तब तक खुले में शौच से मुक्त नहीं मानी जाती जब तक गाँव का एक-एक व्यक्ति शौचालय का प्रयोग नहीं करने लगता हो। अगर उस गाँव का 6 महीने का बच्चा भी शौचालय का प्रयोग नहीं कर रहा है तो गाँव खुले में शौच से मुक्त नहीं माना जायेगा। 

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    जैसा की हमने अपने पिछले खबर में बताया की सीतामढ़ी नगर परिषद की पोल खोल कार्यकर्म की शुरुआत किया है | आज उसका चौथा कड़ी है कल हम  कुच्छ चौकाने वाली खबर के साथ पेश होंगे जो पार्षदों ने अपनी जुबानी कही है |


    इसे आप पढ़े ही नहीं इसके खिलाफ आवाज भी उठाये अगर आपके पास भी इससे सम्न्धित कोई समस्या या सुझाव है या जिले में किसी अधिकारी या कर्मचारी के द्वारा किसी भी कार्य के लिए  पैसो की मांग की गयी हो तो निचे दिए गए नंबर पर आप सम्पर्क करे | और आपको बताते चले की आज सीतामढ़ी शहर के कई वार्डो के लोग हमे फोन करके अपनी समस्या से भी अवगत कराया है | 

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