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    कोरोना का असर , बिहार में कश्मीर के नाम से प्रसिद्ध ककोलत जलप्रपात पड़ा वीरान




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    नवादा ब्यूरो रिपोर्ट 

    बिहार: गर्मी शुरू होते ही शीतल जल प्राप्त और खूबसूरत वादियों का लुत्फ उठाने के लिए लोग ककोलत पहुंचने लगते हैं.  जैसे-जैसे गर्मी बढ़ती है सैलानियों की संख्या में काफी इजाफा हो जाता है. बिहार की राजधानी पटना के लोगों के लिए यह फेवरेट डेस्टिनेशन है.

    ऐतिहासिक ककोलत एक खूबसूरत पहाड़ी के निकट बसा हुआ झरना है. यह झरना बिहार के नवादा से 33 किलोमीटर की दूरी पर स्थित है. ककोलत से तीन किलोमीटर दूर थाली मोड़ पहुंचते ही झरने की शीतलता का एहसास होने लगता है. ककोलत पहाड़ी पर स्थित इस झील के आसपास खूबसूरत दृश्‍यों की भरमार है. झरने के नीचे पानी का एक विशाल जलाशय है.


    ककोलत जलप्रपात सैलानियों के लिए आकर्षण का केंद्र रहा है। इसे नियाग्रा ऑफ बिहार भी कहा जाता है। गर्मियों में काफी लोग यहां पहुचते हैं लेकिन कोरोना संक्रमण काल में यह रमणीक पर्यटन स्थल वीरान पड़ा है।

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    बिहार में कश्मीर के नाम से प्रसिद्ध नवादा जिले के गोविंदपुर प्रखंड के अंतर्गत पड़ने वाले प्राकृतिक पर्यटन स्थल ककोलत जलप्रपात की खूबसूरती को निहारने देश के कोने-कोने से लोग पहुंचते हैं और मौजमस्ती करते हैं। नवादा जिले के गोविंदपुर पहाड़ी श्रृंखलाओं में स्थित है। इस जलप्रपात का प्राकृतिक सौंदर्य अद्भुत है।

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    इसका सौंदर्य ऊटी और एलिफेंटा जलप्रपात से मेल खाता है। लोग इसे ‘बिहार का कश्मीर’ और ‘नियाग्रा ऑफ बिहार’ भी कहते हैं। बिहार में अनलॉक-एक से पर्यटन स्थलों को बाहर रखा गया है। लिहाज़ा गरमी के दिनों में सैलानियों को सौंदर्य देखकर ही संतोष करना पड़ रहा है। सैलानियों का कहना है कि संक्रमण से बाज़ी जीत जाएंगे, तो ककोलत में कभी भी स्नान कर लेंगे।


    सैलानियों पर नजर रखने के लिए पुलिस की तैनाती की गई है। पुलिस के मुताबिक कोई नया निर्देश नहीं आया है। इसलिए नजर रखी जा रही है। पर्यावरण के दृष्टि से ककोलत काफी स्वच्छ दिखने लगा है। लेकिन इससे जुड़े लोगों के समक्ष समस्या उत्पन्न हो गई है। केयर टेकर यमुना पासवान कहते हैं कि ककोलत के इतिहास में यह पहला अवसर है जब गरमी के दिनों में ककोलत खाली दिखता है।

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    शीतल जलप्रपात के कारण ककोलत को बिहार का कश्मीर कहा जाता है। ककोलत और सैलानियों के बीच नैसर्गिक संबंध रहा है । लेकिन कोरोना संक्रमण के कारण खाई पैदा हो गयी है। सैलानी सब कुछ ठीक होने का इंतज़ार कर रहे हैं कि फिर से ककोलत के ठंडे जल-प्रपात का आनंद उठाया जा सके।

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