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    रीगा चीनी मिल प्रबंधन का बड़ा घोटाला ,40 हजार गन्ना किसानों का अरबो रुपया हड़पने फ़िराक में



    We News 24 Hindi »बिहार/सीतामढ़ी 

    ब्यूरो संवाददाता संजू गुप्ता के साथ रोहित ठाकुर की रिपोर्ट 

    एडिटर एंड चीफ दीपक कुमार 

    बिहार: सीतामढ़ी जिले में रीगा चीनी मिल भारत की सबसे पुरानी चीनी मिल में से एक है जिसकी  स्थापना 1933 में ब्रिटिश मैनेजमेंट के तहत द बेलसंड शुगर एंड इंडस्ट्रीज द्वारा की गई थी, जिसे 1950 में धनुका ने अपने अधिकार में ले लिया था। इस चीनी मिल का चीनी  कभी नंबर वन कहलाता था | 

    लेकिन आज वही भारत के सबसे पुरानी चीनी मिल दम तोड़ने के कगार पर है वजह बीते कुच्छ  सालो में चीनी मिल प्रबन्धन के नियत में बईमानी और मक्कारी जिसका हर्जाना  किसान और मिल में काम करने वाले वर्कर भुगत रहे है | 
    आज हम आपको मिल प्रबन्धन की नियत में खोट के बारे बताने जा रहे है जो साजिस के  तहत मिल को बंद कर हजारो  किसानों का अरबो रुपया बिना भुगतान किये भागना  चाहता है | आप इनके कारनामे खुद ही पढ़िए और सोचिये की चीनी मिल मालिक धनुका का नियत कितना पाक और साफ है | लोग कहते है की ओमप्रकाश धानुका बड़े ही धार्मिक प्रविर्ती के इंसान है इसका फैसला आप ही कीजिये की ये कैसे इंसान ओमप्रकाश धानुका कैसा है |

    आइये जानते है ओमप्रकाश धानुका प्रबन्धन का कार्य 
     
    रीगा चीनी मिल पर सीतामढ़ी के गन्ना उत्पादक किसानों का भी तकरीबन 112 करोड़ रुपया बकाया है जिसका भुगतान नहीं होने से तकरीबन 50 हजार किसानों की आर्थिक हालत बहुत खराब है.


    11 मई 2020 को 600 कर्मचारियों को काम से बाहर निकाल दिया गया । मिल प्रशासन द्वारा मुख्य द्वार पर नोटिस लगा दिया | नोटिस पढने के बाद सभी कर्मचारीयों ने मुख्य गेट के सामने हंगामा भी किया था | 

    गन्ना मूल्य का भुगतान नहीं होने से किसान गन्ने की खेती छोड़ रहे हैं। 2018-19 के पेराई सत्र में जहां 46 लाख क्विटल गन्ने की पेराई हुई थी वहीं  2019-20 में आधा से भी कम मात्र 20 लाख क्विटल पेराई हो पाई है। और समय से  दो माह पहले ही  27 फरवरी को मिल को बंद कर दिया गया | 

    2018-2019 भोले भाले किसानो को मिल प्रबंधन गन्ना मूल्य का बकाया तो दिया नहीं लेकिन  बैंक के साथ मिलकर उल्टा  किसानो पर भुगतान देने के बहाने केसीसी के 70 करोड़ रुपये कर्ज चढ़ा दिये जिसके वसूली के लिए बैंक अब किसानो को नोटिस भी भेज रही है | 


    करीब 115 करोड़ तथा लिमीट (केसीसी) के 70 करोड़ रुपये का भुगतान नहीं कर रहा है। जबकि, केसीसी के लिए बैंक का गारंटर बनकर मिल प्रबंधन के द्वारा गन्ना आपूर्ति के साथ मूलधन तथा ब्याज भुगतान की गारंटी की गई थी। मगर, चीनी मिल, किसानों तथा कर्मचारियों के प्रति मिल मालिक की मंशा अब ठीक नहीं लगती। नए सत्र में करीब 60 करोड़ का बकाया हेतु किसान दर-दर भटकने को विवश है । 

    चीनी बिक्री व डिस्टीलियरी से प्राप्त राशि का 85 फीसद किसानों के खाते में भेजने का आदेश भी हुआ था । परंतु कतिपय कारणों से डिस्टीलियरी को मुक्त कर दिया गया। 




    साल 2019 में भी रीगा चीनी मिल प्रबंधन ने मिल को समय से पहले बंद करने के लिए सरकार से गुहार लगाई थी । बहाना ये था की किसानो के पास ईख नहीं है | तो दूसरी और किसानो ने चीनी मिल प्रबंधन के बातो का विरोध करते हुए सरकार से आग्रह किया किया था की गन्ना का आकलन करा कर ही मिल बंद करने का आदेश दे | जब ईंख पदाधिकारी मुजफ्फरपुर जेपीएन सिंह ने क्षेत्र का भ्रमण किया तो पाया की करीब सात लाख क्विटल गन्ना खेतों में लगा हुआ है | इतिहास में पहली बार बिना सर्वे कराए हुए कैलेंडरिग बनाया गया जो दोष पूर्ण था। चीनी मिल द्वारा पूर्जी वितरण में भी व्यापक रूप से धांधली भी किया गया था |

    ईख पदाधिकारी, मुजफ्फरपुर ने मिल के श्री गोयनका के खिलाफ नीलाम वाद दायर किया थ. इसमें आरोप लगाया गया था कि मिल ने 2014-15 के गन्ना मूल्य के बकाये का अब तक भुगतान नहीं किया है. यह वाद 84 करोड़ आठ लाख 19 हजार 519 रुपये बकाये की बाबत दायर किया गया था

    दूसरा वाद संख्या 2/ 2015-16 है. 42 करोड़ 36 लाख 49 हजार 121 रुपये बकाये के विरुद्ध दायर मामले में सीएमडी ओमप्रकाश धानुका को आरोपित किया गया था. इन्हीं दोनों वादों की सुनवाई के क्रम में जिला नीलाम पदाधिकारी ने दोनों आरोपितों के खिलाफ गिरफ्तारी वारंट जारी भी किया था | 

    8 अप्रैल को मिल के मजदूर यूनियन के अध्यक्ष ओमप्रकाश पटेल की हत्या के बाद भाई के बयान पर श्री धानुका व मुख्य महाप्रबंधक के खिलाफ प्राथमिकी दर्ज की गयी थी.तब सीएमडी ओमप्रकाश धानुका और उससे पहले  गोयनका यहां भाग निकले थे  | 

    आपको बताते चले की 2014-15 में गिरफ्तारी का वारंट जारी होने से पूर्व अन्य वाद में सुनवाई पूरी कर जिला नीलाम पदाधिकारी ने ईख पदाधिकारी को मिल के गोदाम में रखी तमाम चीनी को जब्त करने व उसे बेचकर 85 फीसदी राशि किसानों को  भुगतान और  15 फीसदी राशि मिल प्रबंधन को देने का आदेश दिया था. 

    इस मामले में तब के जिला निलाम पदाधिकारी आलोक कुमार ने कहा था  कि दो मामलों में मिल के अधिकारी सुशील कुमार गोयनका व ओमप्रकाश धानुका के खिलाफ गिरफ्तारी वारंट जारी किया गया है. मिल प्रबंधन के यहां किसानों के गन्ना की मोटी राशि वर्षों से बकाया है. तब से लेकर आज के तारीख में बेचारे किसान दर-दर की ठोकरे खाने को मजबूर है | लेकिन ना तो इनकी मज़बूरी को जिलाधिकारी बिहार की नितीश सरकार समझ रही है | इसे आप क्या कहंगे चीनी मिल प्रबंधन का ईमानदारी या बेमानी जो किसानो के अरबो रुपया हड़पने के साथ हत्या जैसा जुर्म में आरोपित है ?

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