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    अमेरिकी राष्ट्रपति ने जी-7 शिखर सम्मेलन में शामिल होने के लिए PM मोदी को निमंत्रण दिया ,निमंत्रण से चीन नाराज






    We News 24 Hindi »नई दिल्ली 

    ब्यूरो संवाददाता काजल कुमारी 


    नई दिल्ली :  चीन के साथ तनातनी के बीच प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी और अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के बीच मंगलवार को फोन पर बातचीत हुई। इस दौरान भारत-चीन विवाद, कोविड-19 की स्थिति और अन्य मुद्दों पर दोनों देशों के नेताओं के बीच चर्चा की गई। प्रधानमंत्री कार्यालय (पीएमओ) की तरफ से जारी बयान में कहा गया कि राष्ट्रपति ट्रंप ने पी एम मोदी को यूएसए में होने वाले जी-7 शिखर सम्मेलन में शिरकत होने के लिए उन्हें न्यौता दिया।


    पीएमओ ने कहा कि प्रधानमंत्री मोदी ने अमेरिका हो रहे प्रदर्शनों को लेकर भी इस दौरान उनसे बात की और इस समस्या के जल्द समाधान होने की उम्मीद जताई। इसके साथ ही दोनों नेताओं ने भारत-चीन सीमा पर जारी तनाव को लेकर भी चर्चा की। पी एम मोदी ने इस दौरान उन्हें भारत-चीन सीमा पर बने हालात के बारे में रूबरू कराया। इसके अलावा, दोनों देशों में कोविड-19 और विश्व स्वास्थ्य संगठन में सुधार की जरूरत पर चर्चा हुई।





    जी-7 सम्मेलन में भारत, रूस, ऑस्ट्रेलिया, कोरिया को न्यौता देने की योजना से चीन नाराज़
    जी-7 शिखर सम्मेलन के लिए भारत, रूस, ऑस्ट्रेलिया और दक्षिण कोरिया को आमंत्रित करने की अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप की योजना पर चीन ने मंगलवार को नाराज़गी भरी प्रतिक्रिया जतायी और कहा कि बीजिंग के खिलाफ किसी गुट बंदी का प्रयास नाकाम साबित होगा।

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    समूह-7 दुनिया की शीर्ष सात विकसित अर्थ व्यवस्था का समूह है। इसमें अमेरिका, ब्रिटेन, फ्रांस, जर्मनी, इटली, जापान और कनाडा शामिल हैं। जलवायु परिवर्तन, सुरक्षा और अर्थव्यवस्था सहित विभिन्न वैश्विक मुद्दों पर चर्चा के लिए इन देशों के प्रमुख की हर साल बैठक होती है। ट्रंप ने जी-7 की बैठक सितंबर तक के लिए स्थगित कर दी है। उन्होंने इच्छा व्यक्त की है कि इस ''पुराने पड़ गए संगठन का विस्तार किया जाए तथा इसमें भारत और तीन अन्य देशों को शामिल किया जाए तथा इसे जी-10 या जी-11 बनाया जाए।

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    भारत और तीन अन्य देशों को जी-7 शिखर सम्मेलन में आमंत्रित करने की ट्रंप की योजनाओं के बारे में पूछे जाने पर चीनी विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता झाओ लिजियन ने यहां मीडिया ब्रीफिंग में कहा, 'चीन का मानना ​​है कि सभी अंतरराष्ट्रीय संगठनों और सम्मेलनों को विभिन्न देशों के बीच आपसी विश्वास बढ़ाने वाला होना चाहिए, जिससे बहुपक्षीयता कायम रह सके और विश्व शांति तथा विकास को बढ़ावा मिल सके।


    उन्होंने कहा कि हमारा मानना है कि यह दुनिया भर के देशों की भारी बहुमत की भूमिका है। उन्होंने कहा कि चीन के खिलाफ कोई भी गुट बंदी का प्रयास विफल होगा। ट्रंप द्वारा भारत और तीन अन्य देशों को आमंत्रित किए जाने से चीन में बेचैनी की भावना है।

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