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    Bihar News :सामने आया रक्सौल का विकास कनेक्शन, सत्तारूढ़ पार्टी को होगी परेशानी।




    We News 24 Hindi » बिहार/राज्य/पूर्वी चम्पारण  

    रोहित ठाकुर  की रिपोर्ट

    #Bihar Champaran News


    • सामने आया रक्सौल का विकास कनेक्शन, सत्तारूढ़ को होगी परेशानी।
    •  विकास के नाम पर मिलेंगे कई मजेदार चीज।


    रक्सौल:- भारत-नेपाल सीमा के उत्तर में बसे बिहार के रक्सौल अनुमंडल में विकास का बड़ा ही तगड़ा कनेक्शन है। ऐसे में जब बिहार विधानसभा चुनाव होने वाला है और रक्सौल से जो विकास का कनेक्शन सामने आया है, वह यहाँ के सत्तारूढ़ जनप्रतिनिधि के लिए घातक साबित हो सकता है। जिसका स्थानीय विपक्ष के नेता जमकर फायदा उठाना चाहेंगे और ऐसे में अगर यहाँ के स्थानीय  विधायक डॉ. अजय कुमार सिंह को पुनः अपनी जीत सुनिश्चित करते हुए पार्टी की साख बचानी हो तो कड़ी मशक्कत करनी पड़ेगी। वरना इसका फायदा महागठबंधन या अन्य कोई उठा सकता है। 

    आइये हम जानते हैं कि रक्सौल से विकास का क्या कनेक्शन है तो आप चौंक गये होंगे कि क्या हम कानपुर वाले विकास दुबे की चर्चा तो नहीं कर रहे, परन्तु यह आपकी भूल है और आप गलत सोंच रहे हैं। हम बात कर रहे हैं इस विधानसभा क्षेत्र में विधायक व अन्य जनप्रतिनिधियों के द्वारा होने वाले विकास की। जो यहाँ के लोगों के किस्मत में शायद देखने को मिलेगी भी या नहीं। हम बारी-बारी से चर्चा करते हैं जो इस प्रकार है।

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     क्या है भारत-नेपाल को जोड़ने वाली सड़क की हालात
    सबसे पहले हम बात करें यहाँ की सड़कों की तो यहाँ सड़क में गड्ढ़े नहीं मिलेंगे, बल्कि गड्ढ़े में ही आपको सड़क नजर आएगा और उसके सहारे आपको चलना है। यानी आप अपने घर सुरक्षित पहुँच गये तो किस्मत वाले वरना कोरोना के कारण तो लगभग किस्मत फुट ही गयी है। सबसे पहले चर्चा करते हैं हम भारत-नेपाल सीमा को जोड़ने वाले मुख्य मार्ग की तो सबसे बुरी स्थिति में भारत-नेपाल मैत्री पुल है, जिस रास्ते से जाने वाले वाहन कब पलट कर अंदर के लोगों की जान ले-ले या फिर पैदल चलने वालों पर गिर जाए कहना काफी मुश्किल है। वहाँ से जब आप मनोकामना मंदिर के रास्ते मे आते हैं तो विकास के नाम पर सड़क पर कई स्विमिंग पूल नजर आ जायेगा, जिसमें बत्तख तैरते नजर आते हैं। खैर कहने के लिए ये सड़क के लिए टेंडर हो चुका है। कब बनेगा यह अभी स्वपन जैसा है।

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    नहर पथ की क्या है स्थिति
    अब बात करते हैं पश्चिमी चंपारण को पूर्वी चंपारण से जोड़ने वाली नहर की तो उसकी लीला ही गजब है। जनाब अगर आप घोड़ासहन कनाल रोड में भेलाही से जब रक्सौल और रक्सौल से आदापुर की ओर बढ़ते हैं तो आपको टूटी हुई सड़के इस बारिश में कम दिखाई देगी और समतल सड़के ज्यादा, क्योंकि उस समतल वाले हिस्से जो पहले से ही ज्यादा गड्ढानुमा होता है उसमें पानी लबालब भरी रहती है। कब कौन वाहन उसमें लुढ़क जाए यह कहना जल्दबाजी होगी। इस सड़क से आने-जाने वाले लोग अपनी जान को जोखिम में डालकर ही आते-जाते हैं। इस सड़क के रास्ते रक्सौल से भेलाही 9 किलोमीटर की यात्रा बाईक से करने में तकरीबन 45 मिनट व चार पहिये से करने में तो 1 घन्टे लग ही जाते हैं। अगर आप जल्दी पहुँच गये इसका मतलब आप लहरिया कट गाड़ी चलाने वाले हैं। कहने को इसका भी टेंडर हो चुका है, बस बनना बाकी है और यहाँ की जनता को देखना बाकी है।

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    नगर परिषद क्षेत्र की सड़क, नाले और ड्रैनेज सिस्टम की स्थिति

    हमारे यहाँ नगर परिषद अद्भुत और अतुलनीय है। नगरपरिषद अपने लोगों के साथ थोड़ा भी बेईमानी नहीं करता है। जैसा है खुद पूरे क्षेत्र को रखता है। अगर आपको विश्वाश नहीं हो तो खुद नगर परिषद जाइये। अगर पैदल जाना हो तो अपने जूत्ते जो निकाल हाथ में रख लीजिए, क्योंकि आपको जल और कीचड़ से मिश्रित सड़क के सहारे हरैया क्षेत्र से कार्यालय तक जाना होगा। फिर वहाँ से वापस आकर कुछ वार्ड घूमना है तो वार्ड 01, 02, 03, 04, 05, 06 आदि कुछ भी घूम सकते हैं। इसमें आपके जूत्ते नहीं घिसेंगे, क्योंकि जूत्ते तो अभी भी आपके हाथों में ही रहेंगे और अगर बाईक है तो डिक्की होगा ही, उसमें जूत्ते रख लीजिए, क्योंकि आपकी बाईक कब पानी और कीचड़ में फंस जाए और दोनों पैरों को नीचे करना पड़े।

     

    हमारे यहाँ नाले की विशेष जरूरत नही पड़ती क्योंकि थोड़ी सी बरसात होने पर नाले एवं सड़क आपसी समझौता कर दोनों बराबर नजर आते हैं। आपकी किस्मत अच्छी तो सड़क मार्ग पहचान उसपर से निकल जाएंगे, वरना नाला मार्ग मिलेगा तो आप उसमें नहा ही लीजिएगा, पैर-हाथ टूटे या सिर फूटे वो बात अलग है। अब इसकी ड्रैनेज सिस्टम यानी जल-निकासी की क्या खिल्ली उड़ाना। नगर परिषद के पास अपना एक भी पम्पिंग सेट नही है। इसका पोल तो उस समय खुल गया जब निरीक्षण करने पहुँची नवपदस्थापित एसडीएम आरती ने पूछा और जवाब में ना मिला तब। हम बता दें कि नाला उमड़ने के बाद खुद अपना निकासी करते हुए सड़क पर आ जाता है और लोगों के लिए कई संदेश देता है। 


     

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    साफ-सफाई और रख-रखाव का जायजा
    जब हमनें शहर की साफ-सफाई का जायजा लिया तो बड़ा ही आश्चर्य लगा। सबसे पहले नगर परिषद मुहल्लों से कचरा उठाता है और फिर उसे मुख्य सड़क पर जमा कर देता है ताकि गुजरने वाले लोग और पड़ोसी देश नेपाल के लोग इसकी खूबसूरती और शहर की सुंदरता का जायजा ले सके। फिर अपने समय से उठाकर नहर या नदी में फेंक दिया जाता है ताकि वह जल भी जलजला बन जाये। सैंकड़ो शौंचालय की ख़रीदगी हुई और उसे आज ऐसी अवस्था मे फेंक दिया गया है जैसे पैसों की कोई कीमत और अहमियत ही न हो।


     विद्युत व्यवस्था की हालत

    वैसे तो शहर की विद्युत व्यवस्था कोई खास बुरी नही है। उपर से मिलने के अनुसार आपूर्ति दी जाती है। ट्रांसफार्मर भी लगभग ठीक ही है। तार को कवरिंग किया गया है, परन्तु कुछ मुहल्ले ऐसे है जहाँ 11 हजार वोल्ट की तार झूले के समान झूलते दिख जाते हैं। कई बार हादसा भी हो चुका है। 220 वोल्ट वाले तार भी कुछ मुहल्ले में ऐसे है जैसे महिलाओं का वश चले तो उस पर घर के कपड़े सुखाना शुरू कर दे। मतलब नंगी अवस्था में नीचे तार लटकते नजर आते हैं।


    पार्किंग और खेल का मैदान

    शहर में अगर हम पार्किंग की बात करें तो यहाँ के जनप्रतिनिधियों को कभी इसे बनाने की जरूरत ही नही पड़ी, क्योंकि यहाँ के लोग अपनी सुविधा अनुसार सड़क के दोनों तरफ से कुल आधे हिस्सो को वो पार्किंग समझ अपना दो पहिया, तीन पहिए, चार पहिया लगा लेते हैं। रिक्शा, टेम्पू, ई-रिक्शा और ताँगा वालों के लिए बीच सड़क जहाँ मन है वहाँ अपना पार्किंग बना लिए। शायद इसलिए कभी किसी को जरूरत नहीं पड़ी। अगर खेल के मैदान की चर्चा करें तो जिसको जहाँ मन करे मुहल्ले में खेल सकता है। मतलब खेल का एक भी मैदान नहीं है।

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    जल-आपूर्ति की व्यवस्था
    शहर में टंकी की कमी नही है। आज से 2 दशक पहले शहर के पोस्ट ऑफीस रोड व मुख्य सड़क पर जल-आपूर्ति सर्वाजनिक थी, पर अब जल तो आता है, परन्तु सड़क पर खुद गिरता है और बन्द हो जाता है। हाँ नल-जल योजना 1 साल से अधिक से बन कर तैयार है। पानी तो अब तक आया नहीं पर पाईप सुंदरता बढ़ा रहा है।


     सिंचाई हेतु नहर की स्थिति

    यहाँ से गुजरने वाली नहर भी कम आँशु नहीं बहाती है। नहर की साफ-सफाई और देख-रेख इतनी अच्छी है कि इसमें कई सारे पशुओं के शव और क्षेत्र की गंदगी का तो दर्शन सालों भर हो जायेगा। नहर का पानी जो कि कल-कल करते हुए पीने योग्य नदी त्रिवेणी से आता है, यहाँ आते-आते जहरीला बन जाता है और ऐसे में जिस खेत को इस नहर से सींचा जाता है, उस खेत का अन्न तो जहरीला होगा ही। यह और बात है कि लोगों में मीठा जहर का काम करता है। नगर परिषद भी अपना कचरा कभी-कभार गिरा ही लेता है।


    खैर एक बात बहुत ही साकरात्मक इस शहर के लिए यह है कि यहाँ के जो भी जनप्रतिनिधि है वो बाहुबली टाईप नही है। जो वेवजह अपना धौंस दिखाए और जनता को परेशान कर। चाहे विधायक हो, सांसद हो या फिर नगर सभापति सबके साथ सामान्य रूप से पेश आते हैं। यहाँ की विपक्ष भी लोगों की साथ देती है। जो सबको एकसूत्र में बाँध कर रखा है। तो यह था रक्सौल का विकास कनेक्शन और यहाँ की जिंदगी।

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