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    National News:भारत का चीन को सामरिक जवाब, लद्दाख में चीन सीमा तक जाएगी दुनिया की सबसे ऊंची रेल लाइन



    We News 24 Hindi » नई दिल्ली 

    रोहित ठाकुर  की रिपोर्ट

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    नई दिल्ली :चीन के साथ सीमा विवाद को देखते हुए रेलवे ने लेह-लद्दाख तक ट्रैक बिछाने की योजना को गति दे दी है। सामरिक दृष्टि से महत्वपूर्ण बिलासपुर-मनाली-लेह परियोजना के प्राथमिक भू सर्वेक्षण का काम पूरा करने के बाद 1500 किलोमीटर रेल सेक्शन की लेवलिंग का काम भी पूरा हो गया है। हिमाचल प्रदेश के बिलासपुर से लेह टाउन के बीच 475 किलोमीटर लंबी ब्रॉडगेज पटरी बिछाने का काम भी शुरू हो गया है।

    सामरिक व पर्यटन की दृष्टि से महत्वपूर्ण इस रेल लाइन का कार्य कोरोना संकट के दौरान भी निर्बाध रूप से चलता रहा है। कंट्रोल प्वाइंट स्थानों की पहचान के लिए कुल रेल मार्ग 475 किलोमीटर के प्राथमिक भू-सर्वेक्षण का कार्य पूरा किया गया है। पुल, सुरंग, स्टेशनों के महत्वपूर्ण स्थानों पर 184 कंट्रोल प्वाइंटों वाले 89 स्थानों की पहचान की गई है। इस सेक्शन पर 1500 किलोमीटर मार्ग के तीसरे चरण की लेवलिंग का काम पूरा हो गया है। उत्तर रेलवे के महाप्रबंधक राजीव चौधरी ने कहा, किसी भी सर्वेक्षण में लेवलिंग का मुख्य उद्देश्य निर्धारित प्वाइंटों के एलिवेशन का पता लगाना है। निर्माण दल ने कम तापमान और कम ऑक्सीजन स्तर वाले दुनिया के सबसे ऊंचे दर्रों में से एक पर लेवलिंग का कार्य पूरा कर लिया है।


    परामर्श समूह दे रहा है सुझाव


    रेलवे ने निर्माण के दौरान तकनीकी सहायता के लिए एक परामर्श समूह का गठन किया है। इसमें भारतीय सुदूर संवेदन संस्थान देहरादून, राष्ट्रीय शिला यांत्रिकी संस्थान बंगलूरू, भारतीय भूवैज्ञानिक सर्वेक्षण, आईआईटी रुड़की, हिम व अवधाव अध्ययन संस्थान से डोमेन के विशेषज्ञ शामिल हैं।

    सुरंगों से होकर गुजरेगा 51 फीसदी मार्ग

    नई रेल लाइन बिलासपुर, सुंदरनगर, मंडी, मनाली, केलांग, कोकसर, डारचा, सरचु, पंग, देबरिंग, उपशी और खारूटो लेह के पहाड़ी इलाकों तक संपर्क बनाएगी। इस रेल लाइन का 51 प्रतिशत मार्ग सुरंगों से होकर गुजरेगा। सबसे लंबी सुरंग 13.5 किलोमीटर की होगी और सुरंगों की कुल लंबाई 238 किलोमीटर होगी।

    10 बड़े पुल बनाने की योजना

    इस रेल मार्ग पर 110 बड़े पुल बनाए जाने की योजना है, जिनकी कुल लंबाई 23 किलोमीटर होगी। 31 रेलवे स्टेशन बनाए जाने का प्रस्ताव है, जिनकी कुल लंबाई 33 किलोमीटर होगी। इस रेल लाइन के निर्माण की अनुमानित लागत 68,000 करोड़ रुपये हैं। दुनिया की सबसे ऊंची रेल लाइन बनाने का कीर्तिमान स्थापित होगा।

    क्या है सामरिक महत्व?

    चीन अगर अरुणाचल प्रदेश तक रेल ट्रैक बिछा रहा है तो भारत भी पीछे नहीं है। चीन सीमा तक भारत दुनिया की सबसे ऊंची रेल लाइन का निर्माण कर रहा है। इसका खास रणनीतिक महत्व लेह में है। यह रेल लाइन वहां तक बिछेगी जहां से कुछ ही दूरी पर चीन की सीमा शुरू होती है। सैनिकों को रसद पहुंचाने में सहयोगी होगा। भारतीय रेलवे के इतिहास में इस लाइन का निर्माण सबसे मुश्किल माना जा रहा है। इस रेल सेक्शन पर ट्रेन 75 किलोमीटर प्रति घंटे की रफ्तार से दौड़ेगी।

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