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    चीन की आतंकी करतूत :आतंकी समूहों को दे रहा है हथियार ,भारत की चिंता बढ़ी


    We News 24 Hindi »नई दिल्ली 

    कविता चौधरी की रिपोर्ट

    #India China Tension

    एम्सटर्डम :हाल ही में म्यांमार-थाइलैंड सीमा पर मेइ ताओ क्षेत्र में बड़ी मात्रा में अवैध चीनी हथियारों की बरामदगी के बाद उत्तर-पूर्वी क्षेत्र में एक बार फिर विद्रोह भड़काने की कोशिश को लेकर भारत की चिंता बढ़ गई है। एक यूरोपीय थिंक टैंक ने यह बात कही है।


    यूरोपीयन फाउंडेशन फॉर साउथ एशियन स्टडीज ने 23 जून को Irrawaddy में प्रकाशित एक रिपोर्ट का हवाला देते हुए कहा, ''शुरुआती जांच में पता चला कि हथियार म्यांमार के विद्रोही समूहों के लिए ले जाए जा रहे थे। लेकिन इस घटना ने नई दिल्ली में सिक्यॉरिटी सर्किल में भी चिंता बढ़ा दी है। इसने उन गंभीर सवालों पर भी फिर ताजा कर दिया है जो इस क्षेत्र में आतंकवादी समूहों के लिए चीन के समर्थन की गुंजाइश को लेकर लंबे समय से मौजूद थे। थाईलैंड स्थित संगठन ने इसे डिप्लो-आतंकवाद बताया है।''

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    छापे में आतंकियों के पास मिले सरफेस टू एयर मिसााइल


    म्यांमार-थाइलैंड बॉर्डर से मिले हथियारों के चीनी लिंक होने की पुष्टि करते हुए Irrawaddy ने एक सूत्र के हवाले से कहा कि ये हथियार अभी (अराकन आर्मी) के द्वारा इस्तेमाल नहीं किए जा रहे हैं। यूनाइटे वा स्टेट आर्मी और कचिन इंडिपेंडेंस आर्मी के द्वारा बनाए जाने वाले हथियार ऐसे नहीं हैं। वे ऑटोमैटिक फायर नहीं कर सकते हैं। जब्त किए गए हथियार असली हैं और चीन निर्मित हैं।"इसमें सरफेस टू एयर मिसाइल्स भी शामिल थीं।बताया जाता है कि इस छापे के दौरान मिले मिसाइलों की कीमत 70000 से 90000 अमेरिकी डॉलर के आसपास थी। ये हथियार मेड इन चाइना थे।

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    EFSAS ने कहा ''भारत में नॉर्थ-ईस्ट के विद्रोही जो वर्षों से म्यांमार में शरण लेते रहे हैं और AA जिसकी जड़ें म्यांमार के रखाइन स्टेट में हैं, दोनों भारत के लिए सुरक्षा चुनौती पेश करते हैं। राष्ट्रीय सुरक्षा के लिए खतरा होने के साथ वे भारत की ऐक्ट ईस्ट पॉलिसी में भी अड़चन डालते हैं। भारत की शंका निराधार नहीं है। भारत का ऐक्ट ईस्ट प्रॉजेक्ट चीन की रणनीतिक सोच पर भारी है, चीनी हथियारों की आमद इसी के अनुरूप है।''

    हैं.


    इस मामले को लेकर 20 जुलाई को थाइलैंड में भारत की राजदूत सुचित्रा दुरई ने ताक प्रांत के गर्वनर अनसित संपुनथारात से मुलाकात की। इस बीच भारतीय सुरक्षा एजेंसियां म्यांमार और थाइलैंड में अपने समकक्षों से संपर्क में हैं। 


    यूनाइडेट स्टेट मिलिट्री इंटेलिजेंस के लिए काम करने वाले एक पूर्व अधिकारी एंडर्स कोर की 'चीन का म्यांमार में डिप्लो-आतंकवाद' शीर्षक वाले स्टडी रिपोर्ट का हवाला देते हुए EFSAS ने कहा, ''म्यांमार में कूटनीतिक प्रभाव जमाने के लिए चीन आतंकवादी समूह AA को फंड और आधुनिक हथियार मुहैया करा रहा है।" 


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