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    शीतकालीन संक्रांति2020:आज है साल का सबसे छोटा दिन और लम्बी रात ,जाने क्या है इसकी विशेषता

    तस्वीर @We News 24


    We News 24 Hindi »नई दिल्ली 

    ब्यूरो  रिपोर्ट 


    नई दिल्ली: एजेंसी,शीतकालीन संक्रांति एक प्राकृतिक घटना है जो पृथ्वी के प्रत्येक गोलार्ध में हर साल दो बार होती है। जिसे 'हिमल सोलस्टाइस' या 'हाइबरनल सोलस्टाइस' के नाम से भी जाना जाता है। विंटर सोलस्टाइस साल का सबसे छोटा दिन होता है और इसकी रात सबसे लंबी होती है। इसे उत्तरी गोलार्ध में 'सर्दियों का पहला दिन' कहा जाता है। साल 2020 में, यह दिन 21 दिसंबर यानी आज का है।


    संक्रांति क्या है?


    'संक्रांति' एक लैटिन शब्द है जिसका अर्थ है 'रुका हुआ सूरज'। एक संक्रांति एक वर्ष में दो बार होती है - ग्रीष्मकालीन संक्रांति और शीतकालीन संक्रांति (Summer solstice and winter solstice)। जहां समर सोलस्टाइस पृथ्वी पर सबसे लंबा दिन होता है, वहीं विंटर सोलस्टाइस ग्रह पर सबसे लंबी रात होती है।


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    शीतकालीन संक्रांति कब होती है?


    आमतौर पर, उत्तरी गोलार्ध में शीतकालीन संक्रांति 19 से 23 दिसंबर के बीच होती है। इस साल, यह 21 दिसंबर को है। timesanddates.com के मुताबिक, भारत में, शीतकालीन संक्रांति का समय 3.32 (pm) बजे से शुरू होगा।


    शीतकालीन संक्रांति के बारे में मजेदार तथ्य


    हालांकि विंटर सोलस्टाइस को 'विंटर के पहले दिन' के रूप में जाना जाता है, लेकिन इसका अर्थ 'अधिक धूप की वापसी' भी होता है।


    इस साल का विंटर सोलस्टाइस क्यों है खास?
    2020 का शीतकालीन संक्रांति विशेष है क्योंकि यह वह एक दिन होगा जब बृहस्पति और शनि 'महान संधि' का निर्माण करेंगे। 21 दिसंबर को बृहस्पति और शनि ग्रहों के बीच की कोणीय दूरी लगभग 0.06 डिग्री रह जाएगी। ये दोनों ग्रह इतने करीब में आ जाएंगे कि एक-दूसरे में मिलते हुए दिखाई देंगे। बृहस्पति व शनि ग्रह के मिलन की अद्भुत खगोलीय घटना लगभग 400 वर्षों बाद देखने को मिलेगी। इससे पहले 1923 में ये दोनों ग्रह इतने करीब में आये थे।

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    नेशनल एयरोनॉटिक्स एंड स्पेस एडमिनिस्ट्रेशन (NASA) के अनुसार, 'महान संधि' लगभग 400 साल बाद सोमवार को सामने होगी। इसमें कहा गया है कि लोग सूर्यास्त के बाद विशेष प्रकार के उपकरणों के बिना देख सकेंगे।


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    एसोसिएटेड प्रेस से बात करते हुए एक विशेषज्ञ ने कहा, 'मुझे लगता है कि यह कहना उचित है कि इस तरह की घटना आमतौर पर किसी भी व्यक्ति के जीवनकाल में एक बार हो सकती है।' बता दें कि अब 15 मार्च, 2080 की रात को बृहस्पति और शनि को इतने करीब से देखा जा सकेगा। 



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