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    सीतामढ़ी दक्षिण के रामेश्वरम और शिवलिग अछ्वूत से भी पुराणी है बाबा हलेश्वरनाथ ,आज शिवरात्रि पर उमड़ेगा आस्था का सैलाब

    तस्वीर कस्टडी वि न्यूज 24
    बाबा हलेश्वरनाथ (तस्वीर कस्टडी वि न्यूज 24 )


    We News 24 Hindi »सीतामढ़ी /बिहार 
    सुनील कुमार  की रिपोर्ट


    सीतामढ़ी।महाशिवरात्रि के अवसर पर गुरुवार को शिवालयों में आस्था का सैलाब उमड़ेगा। बम-बम भोले के जयघोष से गूंजेगी शिव मंदिर लोग आज  पूजा-अर्चना, जलाभिषेक के लिए भक्तो  में काफी उत्साह है। दूसरी तरफ आज सीतामढ़ी शहर में , भगवान शंकर की बरात की तैयारी चल रही है। जिधर देखे  आस्था और श्रद्धा का अदभुत नजारा दिख रहा है। खासकर शिवरात्रि को लेकर  माता बहनों में अति उत्साह है। महाशिवरात्री के अवसर पर भगवान शिव और उनकी शक्ति की भक्ति में श्रद्धालु लीन रहते हैं। दर्शन व जलाभिषेक को भक्तों की उमड़ने वाली भीड़ के मद्देनजर जिला पुलिस व प्रशासन ने भी पूरी  तैयारी कर रखी है।आज  महाशिवरात्री के अवसर पर हलेश्वर स्थान मंदिर का पट भक्तो के लिए   चौबीसों घंटे  खुला रहेगा। दिनभर पूजा-अर्चना के साथ रात में बाबा का भव्य श्रृंगार किया जाएगा। फूल-मालाओं व बागंबरी पोशाक से श्रृंगार की तैयारी की गई है। फूल, बेलपत्र, धतूरा आदि से पूजन के बाद बाबा का अभिषेक दुग्ध व जल से किया जाएगा। भजन-कीर्तन का भी विशेष प्रबंध है।

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    राजा जनक ने की हलेश्वरनाथ महादेव मंदिर की स्थापना


    राजा जनक ने की हलेश्वरनाथ महादेव मंदिर की स्थापना, श्रीराम-जानकी ने भी यंहा पूजा-अर्चना की यह मंदिर  सीतामढ़ी शहर से  शहर से लगभग सात किलोमीटर की दूरी पर सटे फतेहपुर गिरमिसानी गांव में स्थित है। मान्यता है की इस मंदिर में आने वालो  की झोली कभी खाली नहीं रहती। उनकी हर मुराद भोले भंडारी  आपको बताते चले की ये  शिवलिग अछ्वूत व दक्षिण के रामेश्वरम से भी पुराणी है। शिवलिग की स्थापना खुद राजा जनक ने की थी। जनकपुर से विवाह के बाद अयोध्या लौट रही मां जानकी व भगवान श्रीराम ने भी इस शिवलिग की पूजा की थी। पुरानों के अनुसार, इसी स्थान पर खुद भगवान शिव ने उपस्थित होकर परशुराम को शस्त्र की शिक्षा दी थी। इसी स्थान से राजा दशरथ के हल चलाने के दौरान जगत जननी माता जानकी धरती से प्रकट हुई थीं। यंहा लोग सुख, समृद्धि, शांति, खुशहाली, पुत्र, विवाह व अकाल मृत्यु से बचने के लिए बाबा हलेश्वर नाथ का जलाभिषेक करते हैं। 

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     हलेश्वरनाथ महादेव क्या है इतिहास  

    पुराणों के अनुसार, यह इलाका मिथिला राज्य के अधीन था। एक बार पूरे मिथिला में अकाल पड़ा था। पानी के लिए लोगों में त्राहिमाम मच गया था। तब ऋषि मुनियों की सलाह पर राजा जनक ने अकाल से मुक्ति के लिए हलेष्टि यज्ञ किया। यज्ञ शुरू करने से पूर्व राजा जनक जनकपुर से गिरमिसानी गांव पहुंचे और यहां अछ्वूत शिवलिग की स्थापना की। राजा जनक की पूजा से खुश होकर भगवान शिव माता पार्वती के साथ प्रकट हुए और उन्हे आर्शीवाद दिया। राजा जनक ने इसी स्थान से हल चलाना शुरू किया और सात किमी की दूरी तय कर सीतामढ़ी के पुनौरा गांव में पहुंचे, जहां हल के सिरे एक घड़े में ठोकर लगने से मां जानकी धरती से प्रकट हुईं। उनके प्रकट होते ही घनघोर बारिश होने लगी और इलाके से अकाल समाप्त हुआ। 



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