• Breaking News

    एक जुलाई से भारत में बदल जायेगा 163 साल पुराना अंग्रेजो वाला कानून


    एक जुलाई से भारत में बदल जायेगा 163 साल पुराना अंग्रेजो वाला कानून








    We News 24 Digital News» रिपोर्टिंग सूत्र  / काजल कुमारी 

    नई दिल्ली :- देश में 1 जुलाई से तीन नए आपराधिक कानून लागू होने जा रहे हैं। ये कानून हैं भारतीय न्याय संहिता (बीएनएस), भारतीय नागरिक सुरक्षा संहिता (बीएनएसएस) और भारतीय साक्ष्य अधिनियम (बीएसए), जो भारतीय दंड संहिता (आईपीसी), दंड प्रक्रिया संहिता (सीआरपीसी) और भारतीय साक्ष्य अधिनियम 1872 (आईईए) की जगह लेंगे। नए आपराधिक कानूनों में त्वरित सुनवाई, न्याय, मानवाधिकार संरक्षण और जांच में उन्नत तकनीक के इस्तेमाल पर जोर दिया गया है। मौजूदा मामले पुराने कानूनों के तहत ही चलते रहेंगे। नए कानून क्या बदलाव लाएंगे। आइए जानते हैं। गौरतलब है कि इन कानूनों को 21 दिसंबर 2023 को संसद ने मंजूरी दी थी और 25 दिसंबर 2023 को राष्ट्रपति की मंजूरी मिली थी।


    ये खबर भी पढ़े-ब्रेकिंग:- मुख्यमंत्री नीतीश कुमार की तबीयत अचानक बिगड़ी, मुख्यमंत्री मेदांता में भर्ती।


    भारतीय न्याय संहिता (बीएनएस)

    बीएनएस 163 साल पुराने आईपीसी की जगह लेगा। इससे दंड कानून में अहम बदलाव आएंगे। मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक--


    - ​​बीएनएस की धारा 4 में सजा के तौर पर सामुदायिक सेवा की बात कही गई है। 5,000 रुपये से कम की चोरी के लिए सामुदायिक सेवा की सजा है।


    - यौन अपराधों के लिए कड़े कदम उठाए गए हैं। कानून में शादी का वादा करके धोखे से यौन संबंध बनाने वालों के लिए 10 साल तक की कैद और जुर्माने का प्रावधान है। नया कानून धोखाधड़ी से निपटने के लिए भी है, जिसमें पहचान छिपाकर नौकरी, पदोन्नति या शादी से जुड़े झूठे वादे शामिल हैं।



    ये खबर भी पढ़े-सीतामढ़ी में आपसी झगड़े में पति-पत्नी का कत्ल कर दिया पत्नी ने पति का कत्ल कर दिया


    संगठित अपराध के लिए सख्त सजा

    - संगठित अपराध अब व्यापक जांच के दायरे में होंगे। इसमें अपहरण, डकैती, वाहन चोरी, जबरन वसूली, जमीन हड़पना, कॉन्ट्रैक्ट किलिंग, आर्थिक अपराध, साइबर अपराध और मानव, ड्रग्स, हथियार या अवैध सामान या सेवाओं की तस्करी शामिल है।


    - संगठित अपराध, वेश्यावृत्ति या फिरौती के लिए मानव तस्करी में शामिल लोगों या समूहों को सख्त सजा का प्रावधान है। प्रत्यक्ष या अप्रत्यक्ष भौतिक लाभ के लिए हिंसा, धमकी, डराने-धमकाने, जबरदस्ती या अन्य अवैध तरीकों से किए गए इन अपराधों के लिए सख्त सजा दी जाएगी।


    - राष्ट्रीय सुरक्षा को खतरा पहुंचाने वाले कृत्यों के लिए, बीएनएस ने आतंकवादी कृत्य को ऐसी किसी भी गतिविधि के रूप में परिभाषित किया है जो लोगों में आतंक फैलाने के इरादे से भारत की एकता, अखंडता, संप्रभुता या आर्थिक सुरक्षा को खतरा पहुंचाती है।


    - आतंकवाद को अब बीएनएस की धारा 113 (1) के तहत परिभाषित और दंडनीय बना दिया गया है। साथ ही, राजद्रोह की जगह धारा 152 को लाया गया है, जो राष्ट्रीय एकता और अखंडता के लिए खतरों पर केंद्रित है।


    - आत्महत्या का प्रयास करना अपराध की श्रेणी से बाहर कर दिया गया है, जबकि भीख मांगना शोषण माना गया है।



    ये खबर भी पढ़े-बिहटा में दो शिक्षको की असामयिक मृत्यु से शिक्षको के परिजनों में शोक की लहर


    मॉब लिंचिंग में हत्या के लिए मौत की सजा

    - यह कानून मॉब लिंचिंग जैसे गंभीर मुद्दे से भी निपटता है। इसमें कहा गया है, 'जब 5 या उससे अधिक लोगों का समूह मिलकर नस्ल, जाति या समुदाय, लिंग, जन्म स्थान, भाषा, व्यक्तिगत विश्वास या किसी अन्य समान आधार पर हत्या करता है, तो ऐसे समूह के प्रत्येक सदस्य को मृत्युदंड या आजीवन कारावास की सजा दी जाएगी और जुर्माना भी देना होगा।'


    - मृत्युदंड को केवल आजीवन कारावास में बदला जा सकता है, जिसमें आजीवन कारावास को सात साल के भीतर माफ किया जा सकता है।


    ये खबर भी पढ़े-गाजियाबाद में आग लगने से सात महीने के बच्चे समेत पांच लोगों की दर्दनाक मौत


    भारतीय नागरिक सुरक्षा संहिता (बीएनएसएस)

    भारतीय नागरिक सुरक्षा संहिता (बीएनएसएस) 1973 की दंड प्रक्रिया संहिता (सीआरपीसी) की जगह लेगी। इस नए कानून में कई महत्वपूर्ण बदलाव शामिल किए गए हैं। सबसे बड़ा बदलाव विचाराधीन कैदियों के बारे में है।


    - नए कानून में पहली बार अपराध करने वाले (आजीवन कारावास या कई आरोपों के मामलों को छोड़कर) को अधिकतम सजा का एक तिहाई पूरा करने के बाद जमानत मिल सकती है।


    - अब 7 साल की न्यूनतम सजा वाले अपराधों के लिए फोरेंसिक जांच अनिवार्य है, जिससे यह सुनिश्चित होगा कि फोरेंसिक विशेषज्ञ अपराध स्थल पर साक्ष्य एकत्र करें और रिकॉर्ड करें। अगर किसी राज्य में फोरेंसिक सुविधा नहीं है, तो उसे दूसरे राज्य में सुविधा का उपयोग करना होगा।


    बीएनएसएस में प्रस्तावित प्रमुख बदलाव

    - बलात्कार पीड़िता की जांच करने वाले डॉक्टरों को 7 दिनों के भीतर जांच अधिकारी को अपनी रिपोर्ट सौंपनी होगी।


    - बहस पूरी होने के 30 दिनों के भीतर फैसला सुनाया जाना चाहिए, जिसे 60 दिनों तक बढ़ाया जा सकता है।


    - पीड़ितों को 90 दिनों के भीतर जांच की प्रगति के बारे में सूचित किया जाना चाहिए।


    - सत्र न्यायालय को ऐसे आरोपों पर पहली सुनवाई से 60 दिनों के भीतर आरोप तय करने होते हैं।


    - पुराना कानून सीआरपीसी राज्य सरकारों को 10 लाख से अधिक आबादी वाले किसी भी शहर या कस्बे को महानगरीय क्षेत्र के रूप में नामित करने का अधिकार देता है, ताकि महानगरीय मजिस्ट्रेट की स्थापना की जा सके। हालांकि, नए कानून में इस प्रावधान को हटा दिया गया है।


    भारतीय साक्ष्य अधिनियम (बीएसए)

    भारतीय साक्ष्य अधिनियम (बीएसए) भारतीय साक्ष्य अधिनियम 1872 की जगह लेगा। इसमें इलेक्ट्रॉनिक साक्ष्य को लेकर महत्वपूर्ण बदलाव किए गए हैं। गंभीर अपराधों के लिए फोरेंसिक जांच अनिवार्य कर दी गई है। 

    वी न्यूज 24 फॉलो करें और रहे हर खबर से अपडेट

    .com/img/a/   .com/img/a/   .com/img/a/    .com/img/a/   .com/img/a/   .com/img/a/

    Header+AidWhatsApp पर न्यूज़ Updates पाने के लिए हमारे नंबर 9599389900 को अपने मोबाईल में सेव  करके इस नंबर पर मिस्ड कॉल करें। फेसबुक-टिवटर पर हमसे जुड़ने के लिए https://www.facebook.com/wenews24hindi और https://twitter.com/Waors2 पर  क्लिक करें और पेज को लाइक करें


    कोई टिप्पणी नहीं

    कोमेंट करनेके लिए धन्यवाद

    Post Top Ad

    Post Bottom Ad