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    श्रीमद् भागवत कथा ज्ञान यज्ञ द्वितीय दिवस ,मानव और प्रकृति के बीच पुनः सामंजस स्थापित करना होगा


     We News 24 Hindi »सीतामढ़ी,बिहार

    कैमरामैन पवन साह के साथ ब्यूरो संवाददाता असफाक खान की रिपोर्ट 

    सीतामढ़ी :श्रीमद् भागवत कथा ज्ञान यज्ञ के द्वितीय दिवस पर भगवान की अनंत लीलाओं में छिपे गूढ़ आध्यात्मिक रहस्यों को कथा प्रसंगों के माध्यम से उजागर करते हुए दिव्य ज्योति जाग्रति संस्थान के संस्थापक व संचालक श्री आशुतोष महाराज जी कि शिष्या भागवताचार्य महामनस्वीनि विदुषी सुश्री आस्था भारती जी ने परीक्षित श्राप और पांडवों व विदुर जी के जीवन में होने वाली श्री कृष्ण की कृपा को बड़े ही सुंदर ढंग से दर्शाया।

    परीक्षित  कलयुग के प्रभाव के कारण ऋषि से श्रापित हो जाते हैं। उसी के पश्चाताप में वह सुखदेव जी के पास जाते हैं। परीक्षित जी के मन में आज अनेकों ही प्रश्न है जितने प्रश्न उनके मन में हैं। उतने ही नारद जी के मन में भी थे। नारद जी को समाधान मिला ब्रह्मा जी से और परीक्षित की जिज्ञासा सुखदेव जी से शांत हुई। इसी तथ्य का विस्तार उन्होंने सती के पुनर्जन्म यानि माता पार्वती और भगवान भोलेनाथ के मध्य चली। दिव्य वार्ता गुरु गीता के माध्यम से किया भगवान शिव कहते हैं।

    शिवपूजारतो वापि विषणउपूजारतोsथवा!
                गुरूतत्वविहीनश्चेतत्सर्व व्यर्थमेव हि!!
    अर्थात चाहे शिव जी की पूजा में रत हो या भगवान विष्णु की पूजा में रत हो परंतु यदि गुरु तत्व के ज्ञान से रहित हो तो वह सब व्यर्थ है। साध्वी सुश्री आस्था भारती जी ने कहा कि अगर आप भी उस परमात्मा को जानने की जिज्ञासा रखते हैं तो आपको भी ऐसे ही मार्गदर्शक गुरु चाहिए। यह तो सर्वविदित है कि सूर्य प्रकाशमय तत्व है और चंद्रमा भी प्रकाशमय है किंतु चंद्रमा का अपना कोई प्रकाश नहीं है जब सूर्य प्रकाशित होता है, तब उसी के प्रकाश से चंद्रमा तपता रहता है और वही ताप शीतल होकर हम सब को शीतलता प्रदान करता है। ऐसे ही गुरु भी सुर्य के समान है तथा चंद्रमा एक शिष्य के समान। गुरु रूपी सूर्य के प्रकाश में तपकर ही शिष्य दुनिया को शीतलता प्रदान करने वाला ज्ञान आगे फैलाता है।द्वापर युग में धर्मराज युधिष्ठिर ने सूर्य देव की उपासना कर अक्षय पात्र की प्राप्ति की। हमारे पूर्वजों ने सदैव पृथ्वी का पूजन व रक्षण किया। बदले में प्रकृति ने मानव का रक्षन किया। लेकिन आज विकास की अंधी दौड़ में प्राकृतिक संसाधनों के दोहन के फल स्वरुप धरा, समस्त नदियां विनाश के कगार पर आ खड़ी है।इस बढ़ते प्राकृतिक असंतुलन को नियंत्रित करने व मानव और प्रकृति के बीच सामंजस्य पुनः स्थापित कर पर्यावरण के संवर्धन हेतु संस्थान द्वारा संरक्षण कार्यक्रम को संचालित किया जा रहा है इसके तहत विभिन्न परियोजनाएं लागू की गई है। पिथौरागढ़ के पहाड़ी इलाके में वाटर एंड लाइफ परियोजना, स्वच्छता एवं वृक्षारोपण अभियान, झीलों और नदियों की सफाई का अभियान, जल व ऊर्जा संरक्षण, तुलसी रोपण अभियान संस्थान का यह मानना है कि जब मनुष्य आत्मिक रूप से जागृत हो जाता है तो प्रकृति का दोहन नहीं, उसका पूजन करता है और यह सब जागृत आत्माएं फिर ध्यान के द्वारा प्रकृति को अपनी दिव्य तरंगों से संपोषित करती है।
     बिहार के पारंपरिक एवं अति पवित्र त्यौहार छठ पूजा के आध्यात्मिक रहस्यों को न केवल समझाया बल्कि छठ पूजा के अलौकिक गीत को कथा मंच से गुनगुनाते हुए उन्होंने मानव और प्रकृति के बीच पुनः सामंजस्य स्थापित करने की बात की।

    आज के आमंत्रित विशिष्ठ अतिथिगण
    ●श्रीमती उमा देवी अध्यक्षा जिला परिषद सीतामढ़ी एवं श्री सूर्यकांत प्रसाद जी 
    ●श्री संजय कुमार महतो, प्रमुख सोनबरसा, सीतामढ़ी 
    ●श्री सुधाकर झा वरिष्ठ अधिवक्ता ●श्री मदन प्रसाद भगत, भगत हार्डवेयर सीतामढ़ी 
    ●श्री रास नारायण प्रसाद, नारायण विवाह भवन, सीतामढ़ी। 
    ●डॉ. प्रोफ़ेसर पशुपतिनाथ गुप्ता 
    ●श्री राम जीवन प्रसाद, पूर्व विधायक, सोनबरसा, सीतामढ़ी।
    ●डॉ. आर.एन.पंडित रमन प्रिंसिपल श्री राधा कृष्ण गोयनका कॉलेज सीतामढ़ी।
    ●डॉ.हसन मुस्तफाक प्राध्यापक श्री राधा कृष्ण कॉलेज सीतामढ़ी।


    काजल कुमार द्वारा किया गया पोस्ट 

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