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    Nirbhaya Case2012:क्या भुल्लर की तरह बच जाएगा निर्भया के दोषी विनय भी बच जायेगा फांसी से ?

    We News 24 Hindi »दिल्ली/राज्य
    NCR/दिल्ली/ब्यूरो/संवाददाता आर्यन कुमार 

    नई दिल्ली: निर्भया मामले के दोषी विनय शर्मा की दया याचिका राष्ट्रपति द्वारा खारिज किए जाने के फैसले को चुनौती देने वाली अर्जी पर आज सुप्रीम कोर्ट में सुनवाई हुई. निर्भया केस में दोषी विनय के वकील ने फांसी टालने के लिए नया पैंतरा इस्तेमाल किया, एपी सिंह ने कहा, 'विनय शर्मा की मानसिक स्थिति सही नहीं है, मानसिक रूप से प्रताड़ित होने की वजह से विनय मैनटल ट्रॉमा से गुज़र रहा है, इसलिए उसको फांसी नहीं दी जा सकती है.' वकील ने कहा कि जेल में मनोचिकित्सक विनय की नियमित जांच करते हैं और विनय को दवाई दी जाती है.



    भुल्लर की तरह बच जाएगा विनय?

    यहां बेहद महत्वपूर्ण बात ये है कि क़ानून के मुताबिक़ फांसी देने के समय दोषी शारीरिक और मानसिक रूप से पूरी तरह भलाचंगा होना चाहिए, कोई बीमारी नहीं होनी चाहिए,  इसी क़ानून के मद्देनज़र आतंकवादी देवेंद्र पाल सिंह भुल्लर को फांसी पर नहीं लटकाया जा सका था, क्योंकि  कोर्ट से दोषी ठहराए जाने के बाद फांसी की सज़ा सुनने के बाद वह मानसिक रूप से बीमार हो गया था जिसके चलते उसे फांसी पर नहीं लटकाया जा सका था और अंत में उसकी फांसी की सजा को सुप्रीम कोर्ट ने उम्रक़ैद में तब्दील कर दिया था.

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    भुल्लर के मामले में 1993 में दिल्ली में युवक कांग्रेस के तत्कालीन अध्यक्ष एमएस बिट्टा की कार पर बम से हमला करने की साजिश में फांसी की सजा सुनाई गई थी. इस हमले में नौ लोगों की मौत हुई थी, जबकि बिट्टा सहित 25 अन्य गंभीर रूप से घायल हुए थे. भुल्लर को इस जुर्म के लिए सुप्रीम कोर्ट से भी फांसी हुई थी. राष्ट्रपति ने भी मई 2011 में उसकी दया याचिका खारिज कर दी थी लेकिन भुल्लर की पत्नी ने दया याचिका निपटाने में हुई 8 साल की अनुचित देरी को आधार बनाते हुए सुप्रीम कोर्ट से फांसी माफ करने की गुहार लगाई थी.



    दया याचिका निपटाने में हुई 8 साल की अनुचित देरी और खराब मानसिक स्वास्थ्य के आधार पर कोर्ट ने भुल्लर की मौत की सजा घटाकर उम्रकैद कर दी थी. उस फैसले में तीन न्यायाधीशों की पीठ ने पीठ ने भुल्लर की फांसी माफी की याचिका खारिज करने वाले दो न्यायाधीशों के 12 अप्रैल 2012 के फैसले को भी खारिज कर दिया था, जबकि दो न्यायाधीशों ने भुल्लर की याचिका खारिज करते हुए 12 अप्रैल 2012 को कहा था कि देरी के आधार पर फांसी माफी का लाभ आतंकवादी गतिविधियों और टाडा में दोषी ठहराए गए अपराधियों को नहीं दिया जा सकता.

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    कोर्ट में आज क्या हुआ

    दोषी के वकील एपी सिंह ने आरोप लगाया कि ऑफिशियल फाइल पर एलजी और दिल्ली के गृह मंत्री के हस्ताक्षर तक नहीं है. मुझे भी दया याचिका खारिज होने की जानकारी वाट्सएप्प से मिली. कोर्ट ने वकील एपी सिंह की ऑफिसियल डॉक्यूमेंट / फाइल देखने की मांग ठुकराई.
    सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि हमने फ़ाइल देखी है. दया याचिका खारिज करने की सिफारिश पर एलजी , गृह मंत्री, दिल्ली सरकार के हस्ताक्षर है. एपी सिंह ने कहा कि सरकार द्वारा विनय की मेडिकल रिपोर्ट भी राष्ट्रपति के सामने नहीं रखी. अपराध में बाकी दोषियों के मुकाबले उसकी कम भूमिका की भी जानकारी को राष्ट्रपति के सामने नहीं रखा गया. उसकी खस्ता आर्थिक हालत से जुड़ी जानकारी भी राष्ट्रपति के सामने नहीं रखी गई. मुझे विनय से जुड़े दस्तावेज बार बार अनुरोध के बावजूद नहीं मिले.


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    कोर्ट ने दोषी के वकील एपी सिंह को हिदायत दी. कहा, 'रिव्यू पिटीशन का दायरा सीमित है. आप इधर उधर दलील रखने की बजाए सिर्फ अपनी पेपरबुक के मुताबिक दलीले रखें.'  एपी सिंह ने कहा, 'विनय शर्मा के जीने के अधिकार आर्टिकल 21 का हनन है. राष्ट्रपति के पास लंबित दया याचिका की लाइन लगी हुई है लेकिन सिर्फ इस मामले में पिक एंड चूज़ (Pick and Choose) की नीति को अपनाया जा रहा है, केंद्रीय मंत्री प्रकाश जावेड़कर, स्मृति ईरानी और दिल्ली के मुख्यमंत्री केजरीवाल ने निर्भया मामले को लेकर प्रेस कॉन्फ्रेंस तक की है.'


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