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    भारत के उस चौतरफा दबाव से चीन के हौसले पस्त ,मोदी की महाप्लानिंग से जिनपिंग फेल

    मोदी की महाप्लानिंग से जिनपिंग फेल


    We NEWS 24 HINDI » नई दिल्ली

      संवाददाता अमित मेहलावत की रिपोर्ट

    नई दिल्ली: चीन  के पीछे हटते कदम भारत के उस चौतरफा दबाव का नतीजा है जो भारत ने उसपर बनाया है। चाहे वो चीन को उसी की भाषा में जवाब देना हो या फिर ट्रंप से बातचीत कर चीन को हराने का प्लान तैयार करना हो, पीएम मोदी के निर्णायक कदमों की वजह से ही आज चीन के तेवर नर्म पड़े हैं।

    मोदी की महाप्लानिंग से जिनपिंग फेल!
    चीन दो दिन पहले तक चीन एलएसी पर युद्धाभ्यास करने में लगा था। खुद चीन की सरकारी मीडिया ने वो तस्वीरें जारी की थी जिसमें रात के अंधेरे में चीनी सेना युद्ध की तैयारियों में लगी थी। लेकिन अचानक ऐसा हुआ जिससे चीन को सेना को पीछे हटने पर मजबूर होना पड़ा। चीन के इस कदम के पीछे पी एम मोदी की वो रणनीति है जो एक बार फिर सुपरहिट साबित हुई है। भारत ने चीन को चारों ओर से ऐसा घेरा कि उसे घुटने टेकने पर मजबूर होना पड़ा।



    मोदी का से मैस्ट्रोकोक नंबर 1: ट्रम्प से बातचीत में उठाया गया मुद्दा
    अमेरिका (अमेरिका) चीन का दुश्मन नंबर 1 है और चीन को हर तरफ से घेरने में लगा है। चीन कभी नहीं चाहता कि अमेरिका, भारत और चीन के विवाद के बीच आए और इसका फायदा उठाने की कोशिश करे। पीएम मोदी और डोनाल्ड ट्रम्प (डोनाल्ड ट्रम्प) के बीच बातचीत में उठा सीमा विवाद का मुद्दा चीन को कतई मंजूर नहीं था।




    ट्रम्प ने पहले भी नियोक्ताता की बात जब की थी। जब चीन ने ठुकरा दी थी और अब भी जब चीन से मोदी और ट्रम्प की बातचीत पर पूछा गया तो उसने साफ संदेश दे दिया कि उसे अमेरिका का दखल मंजूर नहीं है। चीन के विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता ने कहा कि सीमा पर अब स्थिति नियंत्रण में है। चीन और भारत के पास ऐसी समस्या को सुलझाने के लिए पर्याप्त तंत्र हैं। हम इसे बातचीत से हल कर सकते हैं। किसी तीसरे की आवश्यक्ता नहीं है। '

    मोदी का ‘मास्टरस्ट्रोक 'नंबर 2: चीन को उसी की भाषा में जवाब देना है
    चीन लद्दाख में एलएसी के पास लगातार सैन्य ताकत बढ़ रही थी और एलएसी पर जैसे ही चीनी सैनिकों के जमावड़े की खबर सामने आई। भारत की ओर से तुरंत कार्रवाई की गई और 5 हजार सैनिकों की तैनाती के साथ  साजो सामान पहुंच गया। भारत सरकार ने साफ कर दिया कि अगर मामला कूटनीतिक और बातचीत से नहीं सुलझा तो दूसरे विकल्प भी तैयार हैं। इस तरह के बयान और आक्रामकता देख चीन को पता लग गया कि भारत में कटौती नहीं हुई।

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    मोदी का लों मास्टरस्ट्रोक नंबर 3: अपने चेहरे पर अडिग भारत
    चीन लद्दाख में लगातार आगे बढ़ने की फिराक में था और भारत की लगातार उसका सामना करना पड़ रहा था। चीन को उम्मीद थी कि भारत सरकार में आकर अपना एलएसी पर निर्माण कार्य रोक देगा। लेकिन भारत ने साफ कर दिया कि ना तो कोई काम रुकेगा और ना ही किसी तरह के दबाव में झुकेगा .. भारत के इस आक्रामक रवैये की चीन को उम्मीद नहीं थी। चीन को जब लगने लगा कि अब मामला हाथ से निकल सकता है तो उसकी तरफ से अलग अलग बयान आने लगे जिसमें सुलह की बात ज्यादा थी। ।

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    मोदी का ‘मास्टरस्ट्रोक 'नंबर 4: लीड फ्रॉम द एम की मिसाल की शुरुआत
    चीन के साथ जैसे तनाव बढ़ रहा है वैसे ही पीएम मोदी खुद आगे आए और शीर्ष सैन्य अधिकारियों के साथ बैठक कर हालात को सुधारा। जिससे चीन को कड़ा संदेश मिला। इतना ही नहीं, विवाद सुलझाने के लिए पीएम ने अपनी उसी डोकलाम टीम को लगाया जिसने डोकलाम के वक्त विवाद को हल किया था।

    पीएम मोदी के यही कदम चीन पर भारी पड़ा और चारों तरफ दबाव में घिरने के बाद अब चीन की चाल में थोड़ा सुधार आया है और वह पीछे हटने को मजबूर हुआ।

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