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    क्यों हुआ इरान में हिजाब आन्दोलन, क्यों काटे महिलाओ ने अपने बाल ,देखे वीडियो

     


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    We News 24 Digital»रिपोर्टिंग सूत्र  / दीपक कुमार 

    नई दिल्ली:  आईये जानते है की किसलिए इरान में हिजाब आन्दोलन ने तुल पकड़ा है क्यों इरानी महिलाये आग के हवाले कर रहे अपना हिजाब तो आइये जानते है .ईरान  में सात साल से ऊपर की लड़कियों से लेकर हर उम्र की महिलाओं तक को घर के बाहर निकलते वक्त सलीके से हिजाब पहनना अनिवार्य है. इस कानून के उल्लंघन पर सजा तक का प्रावधान है. कहते है जबतक कोई कानून अपने हद में रहे तो उसको सभी लोग मानते है जब कानून अत्याचार बन जाय तो लोग उनका विरोध करने लगते है .

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     ऐसा ही हुआ इरान कुर्द की 22 साल लड़की महसा अमिनी के साथ .महसा अमिनी अपने भाई के साथ ईरान की राजधानी तेहरान से अपने रिश्तेदारों से मिलने जा रही थी .तब महसा को स्थानीय पुलिस ने सलीके से हिजाब नहीं पहनने के आरोप में हिरासत में लिया और उससे सख्ती से पूछताछ की तभी महसा का तबियत बिगड़ा और अस्पताल में उसकी मौत हो गयी .महसा की मौत ने पुरे इरान की महिला को अपने ही देश के खिलाफ सडको पर उतरने को मजबूर कर दिया इस वक्त पुरे इरान में हिजाब कानून को लेकर महिला बागी हो गयी है .

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    महिलाएं सड़कों पर बगैर हिजाब निकल आईं और सरकार विरोध नारे  लगाने लगीं. महसा को दफनाने के दौरान उसके शहर साकेज में महिलाओं के बाल काटने और हिजाब उतार सरकार विरोध नारे लगाने के वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल हो रहे हैं. इरानी पुलिस अपने बचाव  में कह रही है .महसा अमिनी का मौत दिल के दौड़े पड़ने से हुआ है तो दूसरी तरफ महसा अमिनी की माँ एक ईरानी मीडिया हाउस को बताया कि उनकी बेटी ने ड्रेस कोड से जुड़े कानून के अनुरूप ही पोशाक पहन रखी थी. 

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    महसा को हिरासत में ले पुलिस उन्हें डिटेंशन सेंटर ले गई, जहां भाई की मौजूदगी में उससे पूछताछ की गई. स्थानीय मीडिया रिपोर्ट के मुताबाक पुलिसिया पूछताछ के दौरान भीतर से महसा के चीखने-चिल्लाने की आवाज आई. इसके कुछ देर बाद ही एंबुलेंस आई, जिसके जरिये महसा को अस्पताल ले जाया गया. वहां महसा कोमा में चली गई औऱ बाद में उसकी मौत हो गई. 

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    अस्पताल में लिए गए वीडियो और फोटो में दिख रहा है कि महसा के मुंह में ट्यूब पड़े हुए हैं और उसके कानों से खून रिस रहा है. महसा की आंखों के आसपास भी चोट के निशान देखने को मिले. इसके बाद महसा के अस्पताल वाले वीडियो और फोटो देखते ही देखते वायरल हो गए. ईरान के सुरक्षा बलों ने इस बीच एक बयान जारी कर कहा कि पूछताछ के दौरान अचानक महसा अमीनी गिर पड़ी और उसके बाद उसे दिल का दौरा पड़ गया. जिस वक्त महसा अमीनी को दिल का दौरा पड़ा उस वक्त पुलिस उसे हिजाब से जुड़े नियम-कायदों पर शैक्षणिक प्रशिक्षण दे रही थी. हालांकि महसा के परिजनों का कहना है कि हिरासत में लिए जाने से पहले महसा का स्वास्थ्य बिल्कुल ठीक था.


    आंदोलन ने आग कैसे पकड़ी

    महसा अमीनी की मौत के बाद तमाम लोगों ने ड्रेस कोड और उससे जुड़े कानूनों की आड़ में महिलाओं को हिरासत में लेकर उनके उत्पीड़न की बातें शुरू कर दीं. हालांकि ईरान के सुरक्षा बलों की महसा अमीनी की मौत की जिम्मेदारी नहीं लेने के बाद आंदोलन ने आग पकड़ी. कुर्दिश मानवाधिकार मंच हेन्गॉ के मुताबिक अब तक 38 आंदोलनकारी धरना-प्रदर्शन के दौरान घायल हो चुके हैं. महसा अमीनी की मौत के बाद सबसे पहले आंदोलकारी तेहरान के बाहरी इलाके में स्थित कासरा अस्पताल के बाहर एकत्रित हुए. इसी अस्पताल में महसा को पूछताछ के दौरान कथित तौर पर गिर जाने के बाद लाया गया था. फिर आंदोलन तेहरान के बाहर फैलने लगे, जिसमें अमीनी का शहर साकेज भी शामिल है. आंदोलनों को देखते हुए पुलिस ने अमीनी के अंतिम संस्कार के वक्त लोगों की संख्या सीमित रखने के तमाम जतन किए. यह अलग बात है कि उसकी कब्र के आसपास हजारों की संख्या में लोग एकत्रित थे. अमीनी को सुपुर्द-ए-खाक करने के बाद आंदोलनकारी साकेज के गवर्नर कार्यालय के बाहर जा डटे. यहीं से आंदोलन ने हिंसक रूप अख्तियार कर लिया. कुर्द मानवाधिकार संगठनों के मुताबिक पुलिस ने आंदोलनकारियों के खिलाफ पेपर स्प्रे और टियर गैस के गोलों का इस्तेमाल किया. हालांकि कई वायरल वीडियो में गोलियों की आवाज भी सुनी गईं.



     वायरल वीडियो में महिला आंदोलनकारी अमीनी के प्रति अपनी एकजुटता दिखाते हुए स्वेच्छा से हिजाब उतार कर नारेबाजी कर रही हैं. तेहरान यूनिवर्सिटी की फैकल्टी ऑफ फाइन आर्ट्स में भी सौ से अधिक छात्रों ने शांतिपूर्ण विरोध दर्ज कराया. इन छात्रों के हाथों में महिला, जीवन, आजादी स्लोगन लिखी तख्तियां थीं. कुछ तख्तियों पर हिजाब कानूनों को रद्द करने की मांग भी की गई. कुछ महिलाओं ने अमीनी की मौत पर सरकार का विरोध करते हुए स्वेच्छा से अपने बाल काटते वीडियो भी सोशल मीडिया पर शेयर किए.

    है. 

    क्या है ईरान का हिजाब कानून

    1978-79 में ईरान में इस्लामिक क्रांति के बाद 1981 में सभी महिलाओं के लिए अनिवार्य हिजाब कानून पारित किया गया. इस्लामिक पेनल कोड की धारा 638 के तहत सार्वजनिक जीवन, सड़कों पर किसी भी महिला के लिए बगैर हिजाब पहने निकलना अपराध है. ईरान सरकार इस कानून को लेकर कितनी कट्टर है उसे इस बात से समझा जा सकता है कि प्रशासन सार्वजनिक परिवहन के वाहनों में फेशियल रिकग्निशन टेक्नोलॉजी को लागू करने पर विचार कर रहा है ताकि हिजाब कानूनों का सलीके से पालन नहीं करने वाली महिलाओं की पहचान की जा सके. यह अलग बात है कि जुलाई में राष्ट्रीय हिजाब और शुद्धता दिवस पर ईरान में बड़े पैमाने पर महिलाओं ने सोशल मीडिया पर हिजाब उतार कर अपना विरोध-प्रदर्शन दर्ज कराया. कुछ महिलाओं ने बसों में बगैर हिजाब के यात्रा करते हुए अपनी फोटो और वीडियो सोशल मीडिया पर डाले. इन विरोध प्रदर्शन को देख ईरानी राष्ट्रपति इब्राहिम रईसी ने हिजाब और शुदद्धता कानूनों को नए प्रतिबंधों संग कड़ाई के साथ लागू करने का आदेश दे दिया. इसके तहत अनुचित तरीके से हिजाब पहनने के साथ-साथ अब महिलाओं पर हाई हील्स और स्टॉकिंग्स के पहनने पर भी रोक लगा दी गई. इन आदेशों में कहा गया कि महिलाओं के लिए अपनी गर्दन और कंधों को भी ढंक कर रखना अनिवार्य है. 

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