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    महाराष्ट्र वसूली कांड : सुप्रीम कोर्ट ने महाराष्ट्र सरकार और देशमुख की याचिका खारिज ,कहा- आरोप गंभीर हैं, स्वतंत्र जांच जरूरी




    We News 24 Hindi »नई दिल्ली 
    मिडिया  रिपोर्ट।


    नई दिल्ली:  सुप्रीम कोर्ट में गुरुवार को बॉम्बे हाईकोर्ट की सीबीआई जांच के आदेश के खिलाफ महाराष्ट्र सरकार और अनिल देशमुख की अर्जी पर सुनवाई हुई. वकीलों की दलील सुनने के बाद सुप्रीम कोर्ट ने देशमुख के खिलाफ लगे आरोप की CBI जांच के बॉम्बे HC के आदेश पर दखल देने से इनकार कर दिया है. कोर्ट ने महाराष्ट्र सरकार और देशमुख की अर्जी को खारिज कर दिया है. कोर्ट ने कहा कि जिस तरह के आरोप लगे हैं, जिस हैसियत के शख्स पर आरोप लगे हैं, स्वतंत्र जांच एजेंसी से जांच ज़रूरी है. ये लोगों क़े विश्वास से जुड़ा मसला है.

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    महाराष्ट्र सरकार की ओर से वरिष्ठ वकील अभिषेक मनु सिंघवी ने कोर्ट में दलील पेश की. जस्टिस कौल ने सवाल उठाया कि देशमुख के खिलाफ लगे आरोप बेहद संगीन हैं, क्या ये अपने आप में सीबीआई जांच के लिए उपयुक्त केस नहीं है? इस पर अभिषेक मनु सिंघवी ने कहा कि राज्य सरकार पहले ही सीबीआई जांच की अनुमति वापस ले चुकी है. जस्टिस कौल ने टिप्पणी की कि जब पुलिस कमिश्नर ने राज्य के गृह मंत्री पर आरोप लगाए हैं तो क्या यह CBI जांच के लिए फिट मामला नहीं है? सिंघवी ने कहा कि वह गृह मंत्री नहीं हैं. इस पर जस्टिस कौल ने कहा कि हाईकोर्ट के आदेश के बाद अनिल देशमुख ने पद छोड़ा है. इस पर सिंघवी ने कहा कि मामला CBI को इसलिए दिया गया कि वह गृह मंत्री हैं, लेकिन अब तो उन्होंने पद छोड़ दिया है.

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    अब अनिल देशमुख की ओर से वरिष्ठ वकील कपिल सिब्बल कोर्ट ने सुप्रीम कोर्ट में दलील पेश करते हुए कहा कि बॉम्बे हाईकोर्ट का फैसला गलत है. ये इंसाफ का माखौल है. सिब्बल ने कहा कि HC ने बिना उनका (देशमुख ) का पक्ष सुने सीबीआई को प्राथमिक जांच का आदेश सुना दिया है. इस पर जस्टिस गुप्ता ने टिप्पणी की कि क्या प्राथमिक जांच पर फैसले से पहले संदिग्ध को सुनना जरूरी है. 

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    सिब्बल ने सवाल उठाया कि कैसे बिना सबूतों के अभाव में एक राज्य के गृह मंत्री के खिलाफ CBI जांच का आदेश दिया जा सकता है, जो तथाकथित पत्र परमबीर सिंह की ओर से लिखा गया है, उसमें कोई सबूत नहीं है, वो महज एक प्रेस कॉन्फ्रेंस की तरह है. सिब्बल बार-बार वही सवाल उठाए कि कोर्ट ने बिना उनका पक्ष सुने सीबीआई जांच का आदेश सुना दिया है. ये आदेश राज्य पुलिस पर बेवजह अविश्वास करना हुआ है. 


    इस पर कोर्ट ने फिर याद दिलाया कि ये एक होम मिनिस्टर और पुलिस कमिश्नर का मामला है. आरोप बेहद संजीदा है. सीबीआई जांच से क्या दिक्कत है? देशमुख की ओर से कपिल सिब्बल ने दलील दी कि सुप्रीम कोर्ट और हाईकोर्ट जांच कर ले, हमें कोई दिक्कत नहीं है. इस पर कोर्ट ने टिप्पणी की है कि अब आप ऐसे अपनी सुविधा के लिहाज से जांच एजेंसी तो नहीं चुन सकते हैं.

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    देशमुख की ओर से सिब्बल ने कहा कि मैं ये नहीं कह रहा है कि मेरे खिलाफ प्राथमिक जांच नहीं होनी चाहिए पर ऐसा फैसला लेने से पहले मुझे सुना तो जाना चाहिए था. बिना सबूतों के आरोप की बिनाह पर जांच का आदेश दे दिया गया, ऐसे तो किसी पर भी आरोप लगाए जा सकते हैं. इसी बीच जय श्री पाटिल की ओर से हरीश साल्वे ने कहा कि आरोपी को इस स्टेज पर सुनने की ज़रूरत नहीं है. देशमुख की ओर से सिब्बल ने कहा कि मैं आरोपी नहीं हूं. साल्वे ने कहा कि संदिग्ध है. सिब्बल ने कहा कि मैं संदिग्ध भी नहीं हूं.


    कपिल सिब्बल ने कहा कि परमबीर सिंह की चिट्टी में लगाए आरोपों में कोई तथ्य नहीं है. सब कही सुनी बातें हैं. जस्टिस हेमंत गुप्ता ने बॉम्बे  HC के फैसले का हवाला देते हुए कहा कि राज्य सरकार के उच्च पदस्थ लोग मामले में शामिल हैं. लिहाजा HC ने सीबीआई जांच का आदेश दिया है. कोर्ट ने टिप्पणी कि है कि ऐसी सूरत में क्या महज उच्च पदस्थ पर आरोप के चलते सीबीआई जांच का आदेश दे दिया जाएगा, वो भी बिना मेरा पक्ष सुने. 


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